भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक साख में बीते एक साल में साफ सुधार दिखा है। 2026 की अंतरराष्ट्रीय पासपोर्ट रैंकिंग में भारत ने पांच स्थान की छलांग लगाते हुए 80वां स्थान हासिल किया है। यह रैंकिंग इस बात का संकेत है कि दुनिया में भारत की यात्रा और कूटनीतिक पहुंच धीरे-धीरे मजबूत हो रही है। भारतीय नागरिकों के लिए अब विदेश यात्रा पहले के मुकाबले कुछ आसान होती दिख रही है।
पड़ोसी देशों की स्थिति क्या कहती है?
रैंकिंग में भारत के साथ-साथ पाकिस्तान ने भी सुधार दर्ज किया है। पाकिस्तान ने पांच स्थान की छलांग लगाते हुए 98वां स्थान हासिल किया है, जबकि 2025 में उसकी रैंकिंग 103 थी। हालांकि, अब भी दोनों देशों के पासपोर्ट दुनिया की सूची में निचले पायदान पर हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा और वैश्विक भरोसे का सीधा असर पासपोर्ट की ताकत पर पड़ता है।
भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में सुधार सिर्फ यात्रा से जुड़ा आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह देश की अंतरराष्ट्रीय छवि और कूटनीतिक प्रभाव को भी दर्शाता है। आने वाले वर्षों में अगर भारत अपने वैश्विक रिश्तों को और मजबूत करता है, तो भारतीय नागरिकों के लिए विदेश यात्रा और ज्यादा आसान हो सकती है। फिलहाल, 80वीं रैंकिंग यह बताने के लिए काफी है कि भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।