बाल संरक्षण विभाग के अधिकारियों ने तर्क दिया कि घर पर ढंग से देखभाल नहीं की जा रही है। इसी वजह से सेहत में सुधार नहीं हुआ। प्रोटोकॉल के तहत, विभाग की ओर से सामाजिक कार्यकर्ताओं ने माता-पिता से बात की। उन्होंने घर के माहौल का भी निरीक्षण किया।
भारतीय मूल की ऑस्ट्रेलियाई महिला ने अधिकारियों की प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। महिला पिछले काफी समय से अपने बच्चों की कस्टडी के लिए लड़ रही थी। महिला की आत्महत्या के कारण एक बार फिर विदेशों में भारतीय या भारतीय मूल के बच्चों की कस्टडी पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने मृतक महिला और उनके पति पर बच्चों की गलत देखभाल का आरोप लगाया है।
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यह है पूरा मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रियदर्शनी पाटिल (40) अपने परिवार के साथ ऑस्ट्रेलिया में रहती थी। तीन साल पहले उनके बेटे की तबीयत खराब हो गई थी। इलाज के लिए उसे न्यू साउथ वेल्स के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन छह महीने बाद भी बच्चे की सेहत में सुधार न दिखने से उन्होंने दूसरे अस्पताल में इलाज कराने की मांग की, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद से ही बाल संरक्षण का मामला शुरू हो गया।
इस रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने ली दोनों बच्चों की कस्टडी
बाल संरक्षण विभाग के अधिकारियों ने तर्क दिया कि घर पर ढंग से देखभाल नहीं की जा रही है। इसी वजह से सेहत में सुधार नहीं हुआ। प्रोटोकॉल के तहत, विभाग की ओर से सामाजिक कार्यकर्ताओं ने माता-पिता से बात की। उन्होंने घर के माहौल का भी निरीक्षण किया। जांच टीम के छह सदस्यों ने तो विभाग को सकारात्मक रिपोर्ट सौंपी लेकिन विभाग ने सातवीं रिपोर्ट को तवज्जो दी। इसी रिपोर्ट के आधार बाल कल्याण विभाग ने बीमार बेटे के साथ पाटिल के 18 साल के दूसरे बेटे को भी हिरासत में ले लिया।
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बेलगावी में की आत्महत्या
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद पाटिल अपने पति के साथ बच्चों की कस्टडी पाने के लिए लड़ रही थी। तीन साल लड़ने के बाद भी कोई मदद संभव नहीं हो पाई। इस बीच प्रियदर्शनी के पिता की तबीयत खराब हो गई तो वे अपने पिता की देखभाल के लिए अपने घर बेलगावी आ गईं। यहीं 27 अगस्त को उन्होंने आत्महत्या कर ली। पाटिल ने एक सुसाइड नोट भी लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा कि मेरी आत्महत्या के जिम्मेदार मेरे कुछ पड़ोसी, न्यू साउथ वेल्स डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिटीज के अधिकारियों और न्यायाधीश हैं।
भारत सरकार ने दिया था मदद का भरोसा
पाटिल ने बाल कल्याण अधिकारियों के खिलाफ बच्चों को जबरन रखने का आरोप लगाया। ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों की मनमानी के खिलाफ नई दिल्ली स्थित ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग के बाहर विरोध प्रदर्शन किए गए। भारत सरकार ने भी मामले में हस्तक्षेप किया। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विदेश मंत्रालय के माध्यम से मामले को जल्द सुलझाने का वादा भी किया। विदेशी मीडिया के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया के विदेश मामलों और व्यापार विभाग का कहना है कि वह ऑस्ट्रेलियाई महिला की मौत से बहुत दुखी हैं। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने मौत पर संवेदनाएं व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पाटिल के परिवार को कांसुलर सहायता प्रदान की जाएगी।