भारतीय नौसेना ने दुश्मन के छोटे ड्रोन से निपटने के लिए इस्राइल को सीमित संख्या में 'स्मैश-2000 प्लस' का ऑर्डर दिया है। यह एंटी-ड्रोन हथियार कंप्यूटराइज्ड फायर कंट्रोल और इलेक्ट्रो-ऑप्टिक साइट प्रणाली से लैस है। इसे बंदूक और राइफल के ऊपर फिट किया जा सकता है। हथियारों पर लगाने के बाद इसकी मदद से दिन या रात के समय में किसी भी छोटे ड्रोन को हवा में मार गिराया जा सकता है।
नौसेना के मुताबिक, स्मैश की मदद से दुश्मन देश के ड्रोन हमले और उससे जुड़ी जानकारी जुटाने में भी मदद मिलेगी। इस सिस्टम की पहली डिलीवरी अगले साल तक होने की संभावना है। गौरतलब है कि हाल के दिनों में पाकिस्तान से लगने वाली पश्चिमी सीमा पर कई ड्रोन उड़ते हुए नजर आए हैं।
सूत्रों ने बताया, एक स्मैश सिस्टम की कीमत 10 लाख रुपये होगी। इसे राइफल्स के ऊपर लगाया जा सकता है और इसकी मदद से छोटे और तेज गति से मूवमेंट करने वाले ड्रोन्स को हवा में ही ढेर किया जा सकता है। इसकी मदद से दुश्मन ड्रोन्स को 120 मीटर की दूरी से मार गिराया जा सकता है।
हाल के दिनों में सेना के लिए छोटे ड्रोन बड़े खतरे के रूप में उभरे हैं। खास तौर पर जब एक साथ कई छोटे ड्रोन्स सीमा की तरफ बढ़ रहे हों। ऐसे में स्थिति ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है। झुंड में भेजे गए ड्रोन्स अपने दुश्मन के एयर डिफेंस को पूरी तरह से तहस-नहस कर सकते हैं।
भारत में लगातार हथियारों को स्वदेशी तकनीक पर तैयार करने की कवायद जारी है। इसी कड़ी में, भारत अमेरिका के साथ हवाई-लॉन्च वाले छोटे एरियल सिस्टम या ड्रोन स्वार्म विकसित करने के लिए भी तैयारी कर रहा है। इसके अलावा, द्विपक्षीय रक्षा प्रौद्योगिकी और व्यापार पहल (डीटीटीआई) के तहत 'काउंटर-यूएएस रॉकेट, आर्टिलरी और मोर्टार सिस्टम' नामक ड्रोन विरोधी तकनीक को भी तैयार करने में जुटा हुआ है।