भारतीय नौसेना का एक कमांडर 'बकाया बिजली बिल' के भुगतान के नाम पर साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गया। अपराधी उसके क्रेडिट कार्ड से 1.5 लाख रुपये निकालने में कामयाब हो गए। मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया, हालांकि नौसेना कमांडर जल्द ही इस मामले को समझ गया और उसने तुरंत अपना कार्ड ब्लॉक कर दिया। इससे उसने अपने अन्य 1.35 लाख रुपयों की ठगी होने से बचा लिया। जब कार्ड ब्लॉक हुआ तब जालसाज उनसे फोन पर बात कर रहा था। इस घटना का पता तब चला जब उसने पुलिस से संपर्क किया।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि गुरुवार को उनकी पत्नी को एक अज्ञात नंबर से एक मैसेज मिला, जिसमें कहा गया था कि उनका बिजली का बिल लंबित है, इसलिए राशि का भुगतान न करने पर बिजली की आपूर्ति काट दी जाएगी। महिला ने मैसेज को पति को भेज दिया।
जब नौसेना अधिकारी ने दिए गए फोन नंबर कॉल किया, तो कॉल का जवाब देने वाले व्यक्ति (जालसाल) ने बिल का भुगतान करने के लिए मोबाइल पोन पर 'क्विक सपोर्ट' एप डाउनलोड करने के लिए कहा।
अधिकारी ने बताया, एप डाउनलोड होने के बाद जालसाज को कमांडर के मोबाइल फोन तक पहुंच मिल गई और उसने उन्हें दस रुपये भेजने के लिए कहा। जो उनके खाते से डेबिट किया गया था। इसके बाद कमांडर को फोन पर बातचीत में व्यस्त रखते हुए जालसाज ने उनके खाते से पहले 48,999 रुपये और फिर 98,000 रुपये निकाल लिए।
हालांकि, कमांडर ने तुरंत महसूस किया कि कुछ गड़बड़ है और उसने अपने कार्ड को ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू की। जालसाज तब तक 25 हजार रुपये, 98 हजार रुपये, 10 हजार रुपये और 25 हजार रुपये की चार और ट्रांजैक्शंस कर रहा था। तभी कार्ड ब्लॉक हो गया और इन चार ट्रांजैक्शन की कुल राशि उनके (कमांडर) खाते में वापस कर दी गई।
उन्होंने बताया कि अज्ञात जालसाज के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति की डिलीवरी के लिए प्रेरित करने) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 (सी) और 66 (डी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।