भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल राधाकृष्णन हरि कुमार ने भारत-अमेरिका प्रीडेटर (एमक्यू-9बी सीगार्डियन) ड्रोन सौदे को लेकर पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि यह एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करेगा और नवाचार के साथ भारत को वैश्विक मानव रहित हवाई प्रणाली का केंद्र बनने में मदद करेगा। यह देश की सैन्य क्षमता को बढ़ाएगा।
गौरतलब है, पीएम मोदी के अमेरिकी दौरे से पहले रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका से तीन अरब डॉलर में 31 प्रीडेटर (एमक्यू-9बी सीगार्डियन) ड्रोन खरीदने के सौदे को मंजूरी दे दी थी। अधिग्रहण प्रस्ताव को अब आगे की प्रक्रिया का पालन करना होगा, जिसके बाद इसे सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की ओर से मंजूरी दी जाएगी। अधिग्रहण पर निर्णय लेने के लिए डीएसी रक्षा मंत्रालय में सर्वोच्च निकाय है। साथ ही सभी उच्च मूल्य के अधिग्रहणों के लिए सीसीएस की अंतिम स्वीकृति जरूरी होती है। अमेरिका की जनरल अटॉमिक्स निर्मिय प्रीडेटर ड्रोन आईएस और तालिबान जैसे आतंकी समूहों के खिलाफ अमेरिकी युद्ध में सबसे शक्तिशाली हथियार प्रणाली थे।
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भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल हरि कुमार ने बुधवार को कहा कि हमारे राष्ट्रीय हितों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने के लिए भारतीय नौसेना कई दूर-दराज के इलाकों में तैनात है। उन्होंने कहा कि आजकल हर कोई स्वतंत्र और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक की बात कर रहा है। वहीं, भारत के व्यापार का अधिकांश हिस्सा समुद्र के रास्ते जाता है। समुद्र हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
इस दौरान, हरि कुमार ने देश में भारतीय नौसेना के आउटरीच मिशन पर भी बात की। उन्होंने कहा कि हमने अग्निवीर योजना के साथ आउटरीच मिशन शुरू किया है। वर्तमान में, नौसेना में देश के लगभग 656 जिलों से हमारा प्रतिनिधित्व है। हम इसे 100 फीसदी करना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमने पाया कि नौसेना में लद्दाख और पूर्वोत्तर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। हम मणिपुर और अन्य राज्यों में जाने की योजना बना रहे हैं।
लद्दाख का पहली बार दौरा कर युवाओं को नौसेना में शामिल होने की अपील करेंगे-एडमिरल हरि कुमार
पहली बार, नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार केंद्रशासित प्रदेश के युवाओं से नौसेना में शामिल होने का आग्रह करने के लिए लद्दाख का दौरा करेंगे। एडमिरल कुमार जुलाई के पहले हफ्ते में लद्दाख जाएंगे।
नौसेना प्रमुख ने कहा कि हमने जो अग्निवीर योजना शुरू की है, उसे लेकर प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण है कि देश के हर गांव से कम से कम एक अग्निवीर सशस्त्र बल में होना चाहिए। इसी दौरा का मुख्य मकसद युवाओं से संपर्क करना है। नौसेना में अग्निवीर के पहले बैच का प्रशिक्षण नवंबर 2022 में शुरू हुआ था। एडमिरल ने कहा कि जब हमने स्टडी की तो पाया कि मौजूदा समय में देश के सभी जिलों में से करीब 656 जिलों से हमारा प्रतिनिधित्व है। यह करीब 85 फीसदी है। हम आने वाले सालों में इसे 100 प्रतिशत करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नौसेना हर जिले तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पता चला है कि विशेषकर पूर्वोत्तर और लद्दाख ऐसे क्षेत्र हैं जहां से नौसेना में बहुत कम लोग हैं। दिसंबर में हम नगालैंड गए थे। अब हमारी योजना मणिपुर और इसके बाद अन्य राज्यों में जाने की है। उन्होंने कहा कि लद्दाख से नौसेना में केवल सात नाविक और एक अधिकारी ही हैं जोकि बहुत कम है। इसलिए हमारी कोशिश है कि हम उनसे बातचीत करें और अधिक से अधिक लोगों को इसके बारे में जागरूक करने का प्रयास करें।
कल का युद्ध लड़ने के लिए विकसित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत: वायु सेना प्रमुख चौधरी
वायु सेना (आईएएफ) प्रमुख चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने भविष्य के सैन्य अधिकारियों की तैयारी के लिए त्वरित प्रौद्योगिकी निवेश और कल के युद्ध लड़ने के लिए आईएएफ को विकसित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। चीफ मार्शल चौधरी ने भारतीय वायु सेना और सेंटर फॉर एयर पावर स्टडीज की ओर से आयोजित कैपस्टोन सेमिनार में ये बातें कहीं।
वायु सेना प्रमुख ने कहा, सैन्य मामलों में तकनीक के प्रयोग से हुए बदलावों ने हमें इस तथ्य को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया है कि इस क्षेत्र अभी और नए निवेश करने होंगे। भविष्य में सैन्य नेतृत्व को नए विचार पर काम करने के लिए संगठनात्मक दृष्टिकोण से पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा, हमें पता है कि युद्ध करने का तरीका बदल रहा है, लेकिन इसके बावजूद हमें सीखने के लिए औपचारिक शिक्षा को विशेष कार्यक्रमों के साथ जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, हमें जरूरत है कि आने वाले वर्षों में सभी अधिकारियों को फिर से शिक्षित किया जाए, ताकि सेना मजबूत हो सके।