भारतीय नौसेना अमेरिका और फ्रांस समेत आठ देशों की नौसेनाओं के साथ एक मेगा वॉरगेम में हिस्सा ले रही है। नौसेना अभ्यास ला पेरोस हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के सागर मलक्का, सुंडा और लोम्बोक के बीच जलडमरूमध्य में चल रहा है। ये जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। नौ दिन के अभ्यान की शुरुआत 16 जनवरी से हो चुकी है। इसका उद्देश्य समुद्री निगरानी, हवाई संचालन और सूचना साझाकरण के क्षेत्रों में भाग लेने वाले देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है।
फ्रेंच कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (सीएसजी) इस मेगा अभ्यास का मुख्य आधार है। भारतीय नौसेना के अनुसार, भारत का स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित मिसाइल विध्वंसक आईएनएस मुंबई इस अभ्यास का हिस्सा है। भारत, अमेरिका और फ्रांस के अलावा ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलयेशिया, सिंगापुर, कनाडा और यूके ने भी इस अभ्यास में हिस्सा लिया।
इस मेगा अभ्यास पर भारतीय नौसेना ने कहा, "यह अभ्यास समान विचारधारा वाली नौसेनाओं को बेहतर सामरिक अंतरसंचालनीयता के लिए योजना, सूचना साझा करने में घनिष्ठ संबंध विकसित करने का अवसर प्रदान करता है। इस अभ्यास में कठिन और उन्नत मल्टी-डोमेन अभ्यास भी शामिल होंगे।"
ऑस्ट्रेलिया नौसेना ने अपने फ्रंटलाइन विध्वंसक एचएमएएस होबार्ट, जबकि कनाडा ने अपने युद्धपोत एचएमसीएस ओटावा को अभ्यास के लिए भेजा है। अमेरिका ने लड़ाकू जहाज यूएसएस सवाना को तैनात किया। मलयेशिया ने एफएफजी लेकिर और उसके हेलीकॉप्टर और जहाज गागा समुडेरा को भेजा है। एक फ्रेंच रीडआउट में कहा गया कि समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना इस अभ्यास का मुख्य लक्ष्य है। इसमें कहा गया कि नियोजित बातचीत समुद्री सुरक्षा अभियानों को व्यापक स्पेक्ट्रम पर काम करने में सक्षम बनाएगी।