एक सरकारी आंकड़े के अनुसार दुनियाभर की 86 जेलों में करीब 7,620 भारतीय नागरिक सजा काट रहे हैं। जिसमें सबसे ज्यादा 2,084 लोग सऊदी अरब की जेलों में बंद हैं।
लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश राज्यमंत्री एम जे अकबर ने बताया कि कई देशों में कठोर निजी कानूनों के कारण लोकल ऑथिरिटी कैंदियों से जुड़ी कोई सूचनाएं तब तक शेयर की जाती जब तक वह व्यक्ति इसकी अनुमति ने दे दे।
7,620 कैंदियों में से दक्षिण-पूर्वी एशिया, श्रीलंका, चीन, नेपाल और खाड़ी देशों की 50 महिलाएं इन जेलों में कैद हैं। श्रीलंका की जेलों में भारतीय मछुआरें सदियों से सजा काट रहे हैं।
श्रीलंका में सजा काट रहे भारतीय नागरिकों पर सीमा पार करने का आरोप है। वहीं, तमिलनाडू के रहने वाले लोग बांग्लादेश, ब्रूनेई और भूटान की जेलों में सड़ रहे हैं। कनाडा और आस्ट्रेलिया में 115 कैदी हैं जिनपर हत्या, मनी लॉन्ड्रिग और रोड एक्सिडेंट के मामले दर्ज हैं।
एम जे अकबर ने बताया कि 2004 में कैदियों को उनके देश भेजने संबंधी कानून के बनने के बाद लगभग 170 आवेदन आए हैं, जिसमें से 62 भारतीयों को देश लाया गया है। अब तक भारत ने 30 देशों के साथ संधि की है, जिसके तहत कई भारतीयों को वापस लाया गया है।
विदेशी जेलों में बंद भारतीय कैदियों में से 56 प्रतिशत लोग खाड़ी देशों से हैं जिन पर घूस, चोरी और हेराफेरी के छोटे-मोटे आरोप हैं। जानकारी के मुताबिक, सऊदी अरब में शराब पीना, बेचना और बनाना एक कानूनी अपराध है और सऊदी अरब में कुछ लोग शराब पीने की वजह से जेलों में सड़ रहे हैं।
इसके अलावा कुछ भारतीय नागरिक ड्रग्स और मानव तस्करी और वीजा संबंधी मामलों के चलते दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों जैसे थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर की जेलों में कैद हैं। यूरोपियन देश अपने यहां कैद भारतीयों का जानकारी साझा नहीं करते हैं।