भारत ने मंगलवार को रूस से अपील की कि वह उन सभी भारतीयों को रिहा करे, जो रूसी सेना में भर्ती हुए हैं। इससे पहले विदेश मंत्रालय (एमईए) ने जानकारी दी कि रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में एक और भारतीय की मौत हुई है, जिससे मरने वालों की संख्या 10 हो गई है।
मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि केरल के एक व्यक्ति की मौत हुई है और एक अन्य भारतीय नागरिक घायल हुआ है, जिसे इलाज के लिए मॉस्को के अस्पताल में भर्ती किया गया है। जायसवाल ने कहा कि इस मामले को रूसी अधिकारियों और नई दिल्ली में रूस के दूतावास के साथ मजबूती से उठाया गया है। उन्होने यह भी कहा कि भारत ने बाकी भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द रिहा करने की मांग दोहराई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल जुलाई में रूस के रष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने इस मामले को उठाया था और भारतीयों की शीघ्र रिहाई की मांग की थी।
परिवारों के संपर्क में
विदेश मंत्रालय ने कहा, 'रूस की सेना में भर्ती हुए केरल के रहने वाले एक शख्स की दुर्भाग्यपूर्ण मौत के बारे में पता चला है। वहीं, एक अन्य भारतीय नागरिक भी घायल हुआ है और उसका मॉस्को के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। हम मृतकों के परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। मॉस्को स्थित हमारा दूतावास उनके परिवारों के संपर्क में है और हरसंभव सहायता प्रदान की जा रही है।'
रूस के अधिकारियों से लगातार विदेश मंत्रालय संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हम पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने के लिए रूसी अधिकारियों के साथ काम कर रहे हैं। हमने घायल व्यक्ति को भी जल्द से जल्द छुट्टी देने और भारत वापस भेजने की मांग की है।' उन्होंने कहा कि इस मामले को आज मॉस्को में रूसी अधिकारियों के साथ-साथ नई दिल्ली में रूसी दूतावास के समक्ष भी जोरदार तरीके से उठाया गया है। हमने शेष भारतीय नागरिकों की शीघ्र रिहाई की अपनी मांग भी दोहराई है।
अबतक 10 लोगों की हो चुकी मौत
मालूम हो कि पिछले साल छह दिसंबर को संसद में दिए गए जवाब में विदेश मंत्रालय ने बताया था कि रूस में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें उत्तर प्रदेश और गुजरात से दो-दो, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, तेलंगाना, केरल और ओडिशा से एक-एक व्यक्ति शामिल है। यह संभवतः 11वीं ऐसी मौत है।
जयशंकर ने कही थी ये बात
अगस्त में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में कहा था कि सरकार रूस के इस दावे का समर्थन नहीं करती कि भारतीयों ने जानबूझकर रूसी सेना के साथ अनुबंध किए हैं। जवाब में रूसी दूतावास ने कहा था कि मॉस्को किसी भी भर्ती प्रयास में शामिल नहीं रहा है, खासकर सैन्य सेवा के लिए भारतीय नागरिकों को भर्ती करने की ‘धोखाधड़ी योजनाओं’ में। इसने यह भी दावा किया कि रूसी रक्षा मंत्रालय ने अप्रैल 2024 से भारत सहित कई विदेशी देशों के नागरिकों को रूसी सशस्त्र बलों में सैन्य सेवा में प्रवेश देने पर रोक लगा दी है।
अगस्त महीने की शुरुआत में विदेश मंत्रालय ने संसद में बताया था कि इस युद्ध में अब तक आठ भारतीय नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 69 को रूसी सेना से जल्द रिहाई मिलने का इंतजार है। अगस्त महीने में ही पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई परिवार राजधानी दिल्ली में मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इन परिवारों की मांग की थी कि सरकार रूसी सेना में फंसे उनके परिजनों को जल्द से जल्द रिहा करवाए। इसके बाद सितंबर महीने में चार भारतीय नागरिक स्वदेश लौट आए थे, जिन्हें धोखा देकर एक निजी रूसी सेना में भर्ती किया गया था और रूस-यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर किया गया था।