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भारतीय मिसाइल रक्षा प्रणालियों के सामने बेकार हैं पाकिस्तानी मिसाइलें

Thu, 29 Aug 2019 05:02 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पृथ्वी एंटी बैलिस्टिक मिसाइल (प्रतीकात्मक) - फोटो : Social Media
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लगातार बढ़ते खतरों और एक दूसरे पर अविश्वास की भावना के कारण दुनिया के लगभग सभी देश अपने-अपने रक्षा क्षेत्र में सुधार कर रहे हैं। वहीं पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती करवाने के बाद अब जंग का ढोल पीट रहा है। गुरुवार को पाक सेना ने बैलिस्टिक मिसाइल गजनवी का परीक्षण किया।
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दुनिया के लगभग सभी प्रमुख देश दुश्मन देश के मिसाइलों से रक्षा के लिए जरूरी बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली को अपनाए हुए हैं। क्या आप जानते हैं कि भारत के पास भी ऐसी मिसाइल रक्षा प्रणाली मौजूद है जो पाक के किसी भी नापाक हरकत को पल भर में खाक कर सकता है। 

इसके अलावा भारत के पास खुद की अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल मौजूद है जबकि पाकिस्तान के लिए यह अब भी सपना है। भारत ने अपनी सुरक्षा के लिए भारत ने विश्व स्तर के कई मिसाइलों का निर्माण किया है। जिसका कोई तोड़ पाकिस्तान के पास नहीं है। 
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भारत की मिसाइल डिफेंस सिस्टम प्रोग्राम

एंटी सैटेलाइट बैलिस्टिक मिसाइल (मिशन शक्ति) - फोटो : ani
भारत शुरू से ही पाकिस्तान और चीन की ओर से मिलने वाले चुनौतियों को बेअसर करने के लिए एक पूर्ण सुरक्षित एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को विकसित करना चाहता था, लेकिन शुरुआती समय से ही फंड की कमी और सरकार की उदासीनता के चलते यह प्रोग्राम ठंडे बस्ते में चला गया। 1999 के कारगिल युद्ध के समय पाकिस्तान से मिलने वाली चुनौतियों से सरकार और सेना को मिसाइल डिफेंस सिस्टम की कमी बहुत खली। इसे ध्यान में रखकर भारत ने अपने मिसाइल डिफेंस सिस्टम प्रोग्राम को फिर से शुरु कर दिया।

इसके लिए सरकार ने वर्ष 2002 में इस्राइल की एरो-2 इंटरसेप्टर मिसाइल को चुना। लेकिन यह मिसाइल सिस्टम भारत को तभी मिला जब अमेरिका ने इसे बेचने के लिए अनुमति दे दी। दरअसल, तब अमेरिका और भारत के संबंध उतने मधुर नहीं थे। भारत और अमेरिका के बीच अच्छे संबंध यूपीए-2 कार्यकाल से शुरू हुए।

2007 में भारत ने पृथ्वी एयर डिफेंस सिस्टम का किया था सफल परीक्षण

भारत ने भले ही तात्कालिक जरूरतों के लिए इस्राइल से मिसाइल डिफेंस सिस्टम को ले लिया लेकिन वह खुद की स्वदेशी सिस्टम को बनाने में लगा रहा। साल 2007 में भारत ने पृथ्वी एयर डिफेंस सिस्टम का सफल परीक्षण कर दुनिया के उन गिने-चुने देशों का लिस्ट में चौथा देश बन गया जिसके पास अपना बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली है। हालांकि इन्हें अभी सेना को नहीं सौंपा गया है।

फिर भी भारत ने विदेशों से खरीदी गई दो स्तर की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों से सीमाओं को सुरक्षित रखने के साथ ही देश के बड़े शहरों में से दिल्ली और मुंबई को भी सुरक्षित बना लिया है। भारत इसके अलावा रूस से एस-400, अमेरिका से नेशनल एडवांस्ड सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम- II (NASAMS-II) की खरीद करने जा रहा है। ये दुनिया की सबसे बेहतरीन मिसाइल डिफेंस प्रणालियां हैं।
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भारत के मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खासियत

मिसाइल का परीक्षण - फोटो : पीटीआई
भारत ने दो स्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली पृथ्वी एयर डिफेंस (PAD) सिस्टम और एडवांस एयर डिफेंस (AAD) सिस्टम को देश की सामरिक जरूरतों के हिसाब से विकसित किया है। पीएडी सिस्टम जहां हाई एल्टीट्यूड पर मिसाइल को मार गिराने में कारगर है वहीं एएडी सिस्टम कम ऊंचाई पर टर्मिनल चरण में ही दुश्मन देश की मिसाइल को मार गिराने में सक्षम है।

वर्तमान में देश की डिफेंस रिसर्च एण्ड रिसर्च आर्गनाइजेशन (DRDO) ने पीएडी का आधुनिक वर्जन पृथ्वी व्हीकलर डिफेंस सिस्टम का परीक्षण किया है। यह पिछले मिसाइल रक्षा प्रणाली से उन्नत प्रणाली है। जिसमें रेंज और स्पीड के मामले में यह ज्यादा बेहतर होते हुए कई मामलों में अमेरिका के थाड के बराबरी का मिसाइल रक्षा प्रणाली है।
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