भारतीय वायुसेना ने विमान की तस्वीर साझा की
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भारत ने 31 हवाई क्षेत्र बनाए
2017 में हुए डोकलाम गतिरोध के बाद इस साल की शुरुआत में ही भारत सतर्क हो गया है। भारत चीन से सटी लंबी सीमा के करीब कई रणनीतिक बिंदुओं पर सैन्य उपरकरण पहुंचाने लगा है। भारत ने सड़क समेत बुनियादी संरचना का विकास बड़े स्तर पर शुरू कर दिया है। चीन की सीमा के पश्चिमी और पूर्वी हिस्से के नजदीक 31 हवाई क्षेत्रों का विकास किया गया है। इनमें असम के चाबुआ और तेजपुर के एयरपोर्ट सबसे अहम हैं। इसके अलावा भारत ने अरुणाचल के तवांग और दिरांग में दो एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (एएलजी) का भी निर्माण किया है।
सड़क की 73 में से 30 प्रोजेक्ट पूरी
संसद में दी गई जानकारी के अनुसार भारत चीन सीमा के नजदीक 73 सड़कों का निर्माण कर रहा है। इनमें से सड़क निर्माण की 30 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
चीन के बनाए 15 हवाई अड्डे
बीते कुछ वर्षों के दौरान चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के करीब अपने बुनियादी ढांचे के विकास के कई कार्य पूरे किए हैं। चीन ने भारत की सीमा पर 15 प्रमुख हवाई अड्डे और 27 छोटी हवाई पट्टियों का निर्माण पूरा कर लिया है। इनमें हर तरह के मौसम में इस्तेमाल किया जाने वाला तिब्बत का गोंकर का एयरपोर्ट है, जहां एडवांस फाइटर प्लेन तैनात किए गए हैं।
48 घंटों में सीमा पर पहुंच सकती है चीनी सेना
जानकारी के मुताबिक चीन ने तिब्बत और युन्नान प्रांत में बड़े स्तर पर सड़कों और रेल नेटवर्क का जाल बिछा लिया है। चीन का दावा है कि चीनी सेना अब सिर्फ 48 घंटों में सीमा पर पहुंच सकती है। खबरें हैं कि चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास करीब 31 जगहों पर पक्की सड़कें बना ली हैं।
निर्माण में देरी पर कैग की कड़ी आपत्ति
भारत-चीन डोकलाम गतिरोध के बाद नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने भारत-चीन सीमा सड़क परियोजनाओं में हो रही देरी को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी। इसके बाद बीआरओ को अधिक शक्तियां हस्तांतरित की गईं। सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क निर्माण का कार्य बीआरओ के जिम्मे होता है।
भारत-चीन सीमा पर ऐसी 61 सड़कें बनाई जा रही हैं जो सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। बीआरओ को ज्यादा शक्तियां मिलने के बाद चीन सीमा पर सड़कों के निर्माण कार्यों अब तेजी आएगी और यह सड़कें जल्दी बनेंगी।