भारतीय तटरक्षक बल की ताकत में जल्द ही बड़ा इजाफा होने जा रहा है। अधिकारियों ने रविवार को जानकारी दी कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 5 जनवरी को तटरक्षक बल के पहले स्वदेशी रूप से तैयार प्रदूषण नियंत्रण पोत 'समुद्र प्रताप' को बेड़े में शामिल करेंगे।
क्या है पोत की खासियत?
इस 114.5 मीटर लंबे विशाल पोत के निर्माण में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है। 4,200 टन वजनी इस जहाज की गति 22 समुद्री मील से अधिक है और यह बिना रुके 6,000 समुद्री मील तक का सफर तय करने में सक्षम है। यह पोत समुद्री प्रदूषण नियमों को लागू करने, समुद्री कानूनों के पालन, खोज और बचाव कार्यों तथा भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा।
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तटरक्षक बल ने क्या कहा?
गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने दिसंबर में औपचारिक रूप से इसे तटरक्षक बल को सौंपा था। तटरक्षक बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में बताया कि यह दो प्रदूषण नियंत्रण पोतों में से पहला है। उन्होंने जहाज का एक वीडियो भी साझा किया, जिसे इसे आईजीसी का सबसे बड़ा और उन्नत पोत बताया गया है।
पोत अत्याधुनिक तकनीक से है लैस
तटरक्षक बल के अनुसार, यह पोत तेल के रिसाव की जांच करने वाली मशीनों और रासायनिक डिटेक्टरों से लैस है। इसमें 30 मिमी की सीआरएन-91 तोप, एकीकृत अग्नि नियंत्रण प्रणाली वाली दो रिमोट-संचालित बंदूकें, स्वदेशी एकीकृत ब्रिज प्रणाली और स्वचालित बिजली प्रबंधन प्रणाली जैसी अत्याधुनिक तकनीक मौजूद है। साथ ही, इसमें आग बुझाने की उच्च क्षमता वाली बाहरी प्रणाली भी लगी है। अधिकारियों का कहना है कि इस जहाज के शामिल होने से भारत की समुद्री प्रदूषण से निपटने की क्षमता बढ़ेगी और रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में देश मजबूत होगा।
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