भारतीय समुद्री क्षेत्र की निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) की ताकत को और बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। समुद्री रास्तों से राष्ट्रीय सुरक्षा को पैदा होने वाले खतरे में बढ़ोतरी के मद्देनजर संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) ने सरकार से तटरक्षक बल को सशक्त करने के लिए जांच, गिरफ्तारी व जरूरत पड़ने पर सामान या नाव जब्त करने के अधिकार देने की सिफारिश की है। संसद में मंगलवार को रखी गई पीएसी की रिपोर्ट में सरकार से इसके लिए आवश्यक कानून बनाने की सिफारिश की है।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आईसीजी को राष्ट्रीय जल क्षेत्र में तटीय सुरक्षा के समन्वय के लिए जिम्मेदार प्राधिकारी के तौर पर तैनात किया गया है। समिति के मुताबिक, फिलहाल विदेश मंत्रालय की तरफ से लागू द टेरिटोरियल वाटर्स, कांटिनेंटल शेल्फ, एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन एंड अदर मैरीटाइम जोन्स एक्ट-1976 इस बात की इजाजत नहीं देता है कि आपराधिक या देशविरोधी गतिविधियों में लिप्त व्यक्ति या समुद्री जहाज की जांच, गिरफ्तारी और सामान जब्त करने की कार्रवाई की जा सके।
रिपोर्ट में पीएसी ने सरकार का ध्यान इस तरफ भी आकर्षित किया है कि विदेश मंत्रालय भी कई बार यह कह चुका है कि यह कानून आईसीजी या भारतीय नौसेना को इस तरह की शक्तियां देने की शक्ति नहीं रखता है, क्योंकि यह महज भारत के समुद्री क्षेत्र को परिभाषित करता है।
इसी कारण पीएसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देश को समुद्री रास्तों से बढ़ते खतरे के मद्देनजर रक्षा मंत्रालय को सरकार से ऐसा कानून निर्मित करने के लिए कहना चाहिए, जो आईसीजी को और ज्यादा अधिकार देकर सशक्त व मजबूत बना सके।