फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ax-4 Mission: भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक उड़ान; 10 जून को रवानगी, 11 जून को ISS में डॉकिंग

Sat, 07 Jun 2025 06:56 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Axiom-4 Mission: भारत के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला 10 जून को नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरेंगे और 11 जून को 28 घंटे की यात्रा के बाद आईएसएस पहुंचेंगे। ये मिशन भारत के लिए यह खास क्षण होगा, क्योंकि 1984 में राकेश शर्मा के बाद पहली बार कोई भारतीय अंतरिक्ष में जाएगा। राकेश शर्मा रूस के सोयूज मिशन के जरिए अंतरिक्ष में गए थे।
विज्ञापन
10 जून को उड़ान भरेंगे शुभांशु शुक्ला - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। 41 साल बाद, एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला 10 जून को एक्सिओम स्पेस के एक्सिओम -4 (Ax-4) मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की यात्रा पर रवाना होंगे। यह मिशन अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और प्राइवेट कंपनी स्पेसएक्स की साझेदारी में किया जा रहा है।
विज्ञापन


उड़ान का समय और स्थान
एक्सिओम-4 मिशन की लॉन्चिंग अमेरिका के फ्लोरिडा में मौजूद नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से 10 जून को होगी। अंतरिक्ष यान को स्पेसएक्स के फॉल्कन 9 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया जाएगा। इसके बाद, 28 घंटे की यात्रा के बाद, 11 जून को रात 10 बजे (भारतीय समयानुसार) अंतरिक्ष यान अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ेगा।

यह भी पढ़ें - ISRO: इसरो का गगनयात्री एक्सिओम-4 मिशन में करेगा सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण पर अध्ययन, सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम
विज्ञापन


इस मिशन के अन्य यात्री कौन हैं?
शुभांशु शुक्ला इस मिशन में पायलट की भूमिका में हैं। उनके साथ अमेरिका की पेगी व्हिटसन, मिशन कमांडर और अंतरिक्ष में 600 से अधिक दिन बिता चुकी अनुभवी अंतरिक्ष यात्री, हंगरी के तिबोर कापू - मिशन विशेषज्ञ, पोलैंड के स्लावोस वुजनांस्की-विस्नेव्स्की - मिशन विशेषज्ञ और यूरोपीय स्पेस एजेंसी के वैज्ञानिक शामिल होंगे।

वैज्ञानिक प्रयोगों की लंबी सूची
शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में अपने 14 दिनों के प्रवास के दौरान कई खास विज्ञान और पोषण से जुड़े प्रयोग करेंगे। ये प्रयोग इसरो और भारत सरकार के जैव-प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) की तरफ से तैयार किए गए हैं। इनका उद्देश्य अंतरिक्ष में मेथी और मूंग की अंकुरण प्रक्रिया देखना, बीजों को माइक्रोग्रैविटी (अंतरिक्ष की स्थिति) में रखकर धरती पर वापस लाकर उन पर आगे की खेती करना, भविष्य की लंबी अवधि की अंतरिक्ष यात्राओं के लिए पोषण और जीवन-समर्थन प्रणाली विकसित करना है। इसके अलावा, शुक्ला नासा के साथ मिलकर 5 संयुक्त अध्ययन भी करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी और छात्रों से संवाद
अपने 14 दिन के अंतरिक्ष प्रवास के दौरान शुभांशु शुक्ला और उनकी टीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, स्कूल के छात्रों और भारत की अंतरिक्ष इंडस्ट्री के लोगों से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत करेंगे।

यह भी पढ़ें - Axiom-4: अंतरिक्ष मिशन से पहले क्वारंटीन हुए शुभांशु शुक्ला और उनके तीनों साथी, आठ जून को US से होगी लॉन्चिंग
विज्ञापन


इसरो की निगरानी और भविष्य की तैयारी
इसरो प्रमुख वी. नारायणन पिछले हफ्ते एक्सिओम स्पेस गए थे और मिशन की तैयारियों का जायज़ा लिया। शुक्ला का यह अनुभव भारत के आगामी गगनयान मिशन (2027) में भी बेहद उपयोगी साबित होगा। इसरो इस मिशन पर 550 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है।

उड़ान से पहले क्या बोले शुभांशु शुक्ला?
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शुभांशु शुक्ला ने कहा, 'यह एक अद्भुत सफर रहा है, लेकिन सबसे अच्छा अभी आना बाकी है। जब मैं अंतरिक्ष में जाऊंगा, तो सिर्फ उपकरण नहीं बल्कि 1.4 अरब भारतीयों की उम्मीदें और सपने भी साथ ले जाऊंगा।' बता दें कि, एक्सिओम-4 मिशन के सभी यात्री 25 मई से क्वारंटीन में हैं और इमरजेंसी स्थितियों से निपटने के लिए अंडरवॉटर ट्रिलिंग, ग्रैविटी सिमुलेशन और अन्य अभ्यास कर चुके हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें