भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अगले महीने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अपने 14 दिवसीय प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वह कम से कम सात प्रयोग करने वाले हैं। इनमें अंतरिक्ष में फसल उगाना और जल भालुओं पर अध्ययन करना शामिल है।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अगले महीने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अपने 14 दिवसीय प्रवास के दौरान कम से कम सात प्रयोग करने वाले हैं, जिसमें फसल उगाना और अंतरिक्ष में ‘अंतिम जीवित’ जल भालुओं का अध्ययन करना शामिल है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के सहयोग से, मई के अंत में निर्धारित एक्सिओम मिशन-4 (एक्स-4) के दौरान सात प्रयोग करेगा, जिसमें अमेरिका, हंगरी और पोलैंड के अंतरिक्ष यात्री भी शामिल होंगे।
नासा और वॉयेजर के साथ साझेदारी में, इसरो टार्डिग्रेड्स या जल भालुओं के लचीलेपन का अध्ययन कर रहा है, जो छोटे जीव हैं जो चरम स्थितियों में जीवित रहने की अपनी क्षमता के लिए जाने जाते हैं। टारडिग्रेड्स पृथ्वी पर लगभग 60 करोड़ वर्षों से हैं और निकट भविष्य में भी पृथ्वी की जलवायु में होने वाले किसी भी बड़े बदलाव का सामना करने में सक्षम होंगे। यह प्रयोग अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर टार्डिग्रेड्स के पुनरुद्धार, अस्तित्व और प्रजनन की जांच करेगा, अंतरिक्ष-उड़ान और जमीन पर नियंत्रित आबादी के बीच जीन अभिव्यक्ति पैटर्न की तुलना करेगा।
एक्सिओम स्पेस ने कहा कि उनके लचीलेपन के आणविक तंत्र को समझना भविष्य के अंतरिक्ष अन्वेषण को सूचित कर सकता है और पृथ्वी पर अभिनव जैव प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों को जन्म दे सकता है।