भारतीय सेना औपनिवेशिक काल के सहायक सिस्टम को समाप्त कर शांत क्षेत्रों में आम नागरिकों की भर्तियां करने पर विचार कर रही है। दरअसल जवानों द्वारा सहायक सिस्टम का विरोध करने के कई मामले सामने आ चुके हैं। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘हम शांत क्षेत्रों के लिए आम नागरिकों को बतौर सहायक भर्ती करने की सोच रहे हैं। हालांकि अभी यह बदलाव केवल शांतिपूर्ण इलाकों के सैन्य स्टेशनों में ही किए जाने पर विचार हो रहा है।’
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि प्रमुख सैन्य अड्डों व अहम क्षेत्रों में सहायक व्यवस्था जारी रहेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि यह सभी सैनिक कर्तव्यों को परिभाषित करते हैं। ऐसे में सहायकों को हटाने से जगह खाली होगी, जो कि सेना के लिए सही नहीं होगा। फील्ड यूनिट्स में यह परिवर्तन करना मुमकिन और व्यावहारिक नहीं है।
अधिकारी ने बताया कि शांत क्षेत्रों पर आम नागरिकों की सहायक के तौर पर नियुक्ति करने से सेना को भी फायदा होगा। ऐसा करने से सेना अपने जवानों को बाकी जरूरी जिम्मेदारियां दे सकेगी। अधिकारी ने कहा कि हम इस विकल्प के अलग-अलग पहलुओं पर विचार कर रहे हैं। गौरतलब है कि हाल के महीनों में कई ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिसमें सेना के जवानों ने सहायक सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाई है। उनमें से कई जवानों का आरोप था कि अधिकारी उनके साथ नौकर की तरह व्यवहार करते हैं।
सरकार ने किया था सिस्टम का बचाव
हाल ही में सरकार ने सेना में सहायक सिस्टम का मजबूती से बचाव किया था। सरकार का कहना था कि युद्ध और शांति के दौरान अधिकारियों को ड्यूटी के लिए तैयार होने में सहायक जरूरी मदद करते हैं। हालांकि सरकार ने सहायकों से ऐसा कोई काम नहीं करवाने को कहा था, जिससे उनकी गरिमा को ठेस पहुंचती हो।
इसी साल मार्च में रॉय मैथ्यु नाम के एक जवान का शव महाराष्ट्र के देवलाली छावनी में छत से लटका हुआ मिला था। मैथ्यु का एक स्टिंग विडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह वरिष्ठ अधिकारियों के घर का कामकाज कराए जाने की शिकायत कर रहे थे। इसके कुछ दिनों बाद एक अन्य सिपाही ने भी सहायक व्यवस्था की आलोचना करते हुए एक विडियो अपलोड किया। इसमें सिपाही ने अपने वरिष्ठ अधिकारी पर आरोप लगाया कि वह उसके साथ गुलामों की तरह बर्ताव करते हैं।