दुश्मन के दांत खट्टे कर देने वाले 40 हजार से ज्यादा सैनिकों के इस युद्धाभ्यास का नाम सिंधु सुदर्शन रखा गया। इसमें थलसेना के 21 स्ट्राइक कोर (सुदर्शन शक्ति) का प्रयोग किया गया। यह अभ्यास पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज के 100 किमी दायरे में किया गया। इसमें स्वदेशी बंदूकें, बोफोर्स तोप, मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर और टी 90 टैंक आदि को शामिल थे।
इस अभ्यास में रूसी विदेशी राकेट लॉन्चर सिस्टम भी प्रयोग में लाया गया। जिससे लगभग 72 कलस्टर बम गिराए गए। इस युद्धाभ्यास में दुश्मनों के छक्के छुड़ा देने वाले लड़ाकू विमान जगुआर और मिग- 21 का भी प्रयोग किया गया था।
इसके अलावा जवानों को सिखाया गया कि हेलीकॉप्टर रुद्र और मानव रहित विमान हैरोन का इस्तेमाल कैसे किया जाता है। इसकी सहायता से कैसे कम समय में अधिक से अधिक दुश्मनों नुकसान पहुंचा सकते हैं।
बताया जाता है कि सेना तीन साल में एक बार स्ट्राइक कोर का युद्धाभ्यास करती है। सैन्य विशेषज्ञ लगातार सैनिकों की सैन्य गतिविधि पर नजर रखते हैं। इसके बाद वे अभ्यास को अंक प्रदान करते हैं।