साल 2016 में पाकिस्तान में घुसकर भारतीय सेना द्वारा किया गया 'सर्जिकल स्ट्राइक' आज भी दुनिया की जुबान पर है। इस सर्जिकल स्ट्राइक में योगदान के लिए पूर्व नगरोटा कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राजेंद्र निंबोरकर को सम्मानित करने के लिए मंगलवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमें राजेंद्र निंबोरकर ने एक दिलचस्प वाकया सुनाया।
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की सीमा में 15 किलोमीटर अंदर जाने के बाद भारतीय सेना ने तेंदुए के मल-मूत्र का इस्तेमाल किया था, ताकि कुत्तों को शांत रखा जाए। उन्होंने बताया कि सीमा पर आसपास के जंगलों में हमने देखा है कि तेंदुए अक्सर कुत्तों पर हमला करते हैं और इन हमलों से खुद को बचाने के लिए कुत्ते रात को बस्ती में ही रहते हैं।
राजेंद्र निंबोरकर ने बताया 'रणनीति बनाते वक्त हमें पता था कि रास्ते के गांवों से निकलते वक्त कुत्ते भौंकना शुरू कर सकते हैं और सेना पर हमला कर सकते हैं। इससे निपटने के लिए भारतीय सेना तेंदुए का मल-मूत्र अपने साथ लेकर गई थी। उसे गांव के बाहर छिड़क दिया गया, जिससे कुत्ते भौंके नहीं और सेना आसानी से सीमा पार कर सके।'
सैनिकों ने गोपनीयता बनाए रखी
उन्होंने बताया 'सैनिकों ने भी इस मामले में गोपनीयता बनाए रखी। उसके बाद रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने एक हफ्ते में ऑपरेशन को अंजाम देने को कहा। हालांकि मैंने अपनी टुकड़ियों से पहले ही इसपर चर्चा कर ली थी, लेकिन उन्हें जगह के बारे में नहीं बताया गया था। जगह के बारे में सैनिकों को हमले से एक दिन पहले पता चला। इस हमले के लिए सुबह 3.30 बजे का समय चुना गया था। आतंकियों के लॉन्च पैड्स और ठिकानों को पहले ही चिह्नित कर लिया गया था।'
सेना ने 29 आतंकियों को मार गिराया था
हमले से पहले भारतीय सेना सुरक्षित जगह पर पहुंच गई और समय और मौका देखते ही आतंकियों पर हमला बोल दिया। सेना ने इस हमले में 29 आतंकियों को मार गिराया था और आतंकियों के लॉन्च पैड्स और ठिकानों को ध्वस्त कर दिया था। हमले को अंजाम देने के बाद सेना वापस सुरक्षित अपनी सीमा में पहुंच गई। यह पूरी कार्रवाई सेना ने इतनी सफाई से की थी कि पाकिस्तानी सेना हक्की-बक्की रह गई थी।