सैन्य सूत्रों ने बताया कि अराकान आर्मी ने मेगा कलादान परियोजना को उड़ाने की धमकी दी थी। यह परियजोना कोलकाता को म्यांमार के सितवे बंदरगाह से जोड़ेगी। यह पूर्वोत्तर का नया प्रवेशद्वार खोल सकती है। इससे कोलकाता व मिजोरम के बीच की दूरी लगभग एक हजार किमी कम हो जाएगी और उनके बीच सफऱ में लगने वाला समय चार दिन कम हो जाएगा।
कलादन परियजोना पर मंडराते खतरे को देखते हुए भारतीय सेना ने मिजोरम से लगी दक्षिणी म्यांमार की सीमा के भीतर स्थित उग्रवादी शिविरों को खत्म करने का फैसला किया। रक्षा सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना ने म्यांमार की सेना को खुफिया सूचनाएं मुहैया कराईं। सेना के पास यह भी सूचना थी कि अराकान आर्मी के कुछ सदस्य भारतीय सीमा में दाखिल होने की योजना बना रहे थे। सूत्रों ने बताया कि इस उग्रवादी संगठन की ओर से म्यांमार में शिविर स्थापित करने को दोनों देश एक गंभीर समस्या मान रहे थे।
भारतीय सेना ने कालादान परिवहन परियोजना में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी अभियान को अंजाम दिया। सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों की बीच कई दौर की बातचीत के बाद संयुक्त अभियान चलाने का फैसला किया गया। इसके लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास भेजा गया और असम राइफल्स के जवानों को भी तैनात किया गया। म्यांमार से सटे अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी असम राइफल्स पर है। दोनों देशों के बीच वर्ष 2008 में कालादान परियोजना पर सहयोग की सहमति बनी थी। इसके पूरा होने पर मिजोरम म्यांमार के रखाइन राज्य के सितवे बंदरगाह से जुड़ जाएगा।