प्रियंका गांधी तीन घंटे की क्लास में कार्यकर्ताओं को बोलने का भरपूर मौका देती हैं, लेकिन वे उनकी बात खत्म होने पर एक सवाल जरूर करती हैं। यह ऐसा सवाल होता है कि जिसका कार्यकर्ताओं के पास कोई जवाब नहीं होता। मसलन, पार्टी यदि सत्ता में नहीं है तो आप भी सक्रिय नहीं हैं। इसकी क्या वजह है। एक कार्यकर्ता ने बताया, प्रियंका गांधी हर तरह सवाल का बहुत शालीनता से पूछती हैं, मगर सवाल इतना गंभीर होता है कि सामने वाले से उसका कोई जवाब बन ही नहीं पाता। आप अपने को दूसरी पार्टियों से अलग कैसे देखते हैं, वोटरों के बीच में अगर आपको ऐसा सुनने को मिल रहा है कि दूसरी पार्टी जीत में है तो आपकी प्रतिक्रिया क्या रहती है।
चुनाव में शिक्षा, स्वास्थ्य, खेती-बाड़ी, अपराध और जाति-धर्म जैसे दूसरे मुद्दों का कितना प्रभाव है। अगर कांग्रेस पार्टी को दोबारा से सत्ता में लाने या लोगों के बीच ले जाने का मौका आपको मिलता है तो आप उसे किस तरह लेंगे। कार्यकर्ता इस सवाल का जवाब अलग-अलग तरह से देते हैं। कोई जाति कार्ड के आधार पर तो विकास के मुद्दों पर पार्टी को आगे ले जाने की बात कहता है।
प्रियंका गांधी इन सभी कार्यकर्ताओं की बात सुनकर अंत में उन्हें पार्टी की लाइन बताती हैं। ज्योतिरादित्य और प्रियंका गांधी कुछ प्रिंट सामग्री भी कार्यकर्ताओं को देते हैं, लेकिन ज्यादातर बातें उन्हें लिखनी ही पड़ती हैं। डायग्राम और ग्राफ के जरिए भी कार्यकर्ताओं को समझाया जाता है।