भारतीय सेना को बदलती युद्ध तकनीकों के मद्देनजर 12 मैन पोर्टेबल काउंटर ड्रोन सिस्टम मिलने वाले हैं। यह सिस्टम पांच किलोमीटर तक दुश्मन के ड्रोन का पता लगाएगा और उनके सिग्नल को ब्लॉक करेगा। एक्सिसकेड्स को ऑर्डर मिला है। पोर्टेबल प्रकृति इसे किसी भी क्षेत्र में तैनात करना आसान बनाती है।
बदलती युद्ध तकनीकों और आधुनिक हवाई खतरों को देखते हुए भारतीय सेना अब ड्रोन टेक्नोलॉजी पर विशेष ध्यान दे रही है। इसी के तहत सेना को जल्द ही मैन पोर्टेबल काउंटर ड्रोन सिस्टम यानी एमपीसीडीएस मिलने वाला है। यह सिस्टम दुश्मन के ड्रोन का पता लगाने और उनके सिग्नल को ब्लॉक करने में सक्षम है, जिससे जमीन पर तैनात सैनिक सुरक्षित रहेंगे।
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एक्सिसकेड्स कंपनी को भारतीय सेना से 12 एमपीसीडीएस की आपूर्ति का नया ऑर्डर मिला है। कंपनी ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। इस महीने की शुरुआत में एक्सिसकेड्स की सहायक कंपनी मिस्ट्रल सॉल्यूशंस को डीआरडीओ से सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों के अपग्रेड के लिए 10 इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट बनाने का 150 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला था।
तकनीकी क्षमताएं
एमपीसीडीएस पांच किलोमीटर तक दुश्मन के ड्रोन का पता लगा सकता है। यह व्यापक आवृत्ति रेंज में ड्रोन के सिग्नल को ब्लॉक कर सकता है। इस प्रणाली से जमीन पर तैनात सैनिकों को मानवरहित हवाई हमलों से विश्वसनीय सुरक्षा मिलती है।
सेना में विश्वास और रणनीति
एक्सिसकेड्स के रक्षा अध्यक्ष शरद चंद्र बाबू ने कहा कि यह ऑर्डर भारतीय सेना की अगली पीढ़ी की स्वदेशी काउंटर-ड्रोन तकनीकों में विश्वास को दर्शाता है। यह कदम सेना की सुरक्षा और तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।
रणनीतिक महत्व
एमपीसीडीएस की पोर्टेबल और मोबाइल प्रकृति इसे तेज़ी से किसी भी क्षेत्र में तैनात करने की सुविधा देती है। सीमावर्ती इलाकों और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में यह तकनीक महत्वपूर्ण साबित होगी।
भारतीय सेना इस तकनीक के माध्यम से अपने हवाई खतरों से मुकाबले की क्षमता को और मजबूत कर रही है। आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में यह सिस्टम सैनिकों को वास्तविक समय में खतरे की पहचान और उसका मुकाबला करने की सुविधा प्रदान करेगा।