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Sikkim: पलक झपकते ही 'देव दूत' बनकर पहुंच जाती हैं भारतीय सेना, सिक्किम में पर्यटन को मिल रहा है बढ़ावा

सार

आपातकाल के समय में भारतीय सेना अपनी उपस्थिति के आधार पर नागरिक प्रशासन और पर्यटकों को किसी भी सहायता के लिए हमेशा तैयार रहती है। जब भारी बर्फबारी में लोग फंस जाते हैं, तो तुरंत भारतीय सेना अपनी जान दांव पर लगाकर भगवान के दूत बन कर ममद को पहुंच जाते हैं।
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पलक झपकते ही 'देव दूत' बनकर पहुंच जाती हैं भारतीय सेना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय सेना, सीमाओं की रक्षा करते हुए, विशेषकर सिक्किम के सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई पहल कर रही है। जबकि राज्य नागरिक प्रशासन और पर्यटन विभाग सिक्किम के संरक्षित सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही को नियंत्रित करता है। खासकर आपातकाल के समय में भारतीय सेना अपनी उपस्थिति के आधार पर नागरिक प्रशासन और पर्यटकों को किसी भी सहायता के लिए हमेशा तैयार रहती है। जब भारी बर्फबारी में लोग फंस जाते हैं, तो तुरंत भारतीय सेना अपनी जान दांव पर लगाकर भगवान के दूत बन कर ममद को पहुंच जाते हैं। ऐसे मौकों पर लोग भारतीय सेना को भगवान का दूसरा रूप मानने लगते हैं। भारतीय सेना हर मौसम में, हर स्थिति में पर्यटकों की स्वास्थ्य का भी ध्यान रखती है। 
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भारतीय सेना के जवान - फोटो : अमर उजाला
21 फरवरी को 500 से अधिक पर्यटकों की सहायता

सूत्रों के मुताबिक 21 फरवरी 24 को, सेना ने नथुला में फंसे 500 से अधिक पर्यटकों की सहायता की, जब अचानक बर्फबारी से सड़क अवरुद्ध हो गई और तापमान शून्य से नीचे चला गया। सिक्किम के सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सेना की टुकड़ियां पर्यटकों को पूर्वी सिक्किम में नथुला, हरभजन बाबा मंदिर, शेरथांग, ओल्ड सिल्क रोड आदि स्थानों और उत्तरी सिक्किम में युमथांग घाटी, जीरो पिंट, गुरुडोंगमार झील और अन्य स्थानों की यात्रा की सुविधा प्रदान करती हैं। जो सिक्किम आने वाले पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण।सालाना दस लाख से अधिक आगंतुकों के साथ पर्यटन स्थानीय लोगों के लिए आय का एक प्रमुख स्रोत है। 

लोगों की मदद करते भारतीय सेना के जवान - फोटो : अमर उजाला
सेना ने सुकना में विकसित की है हेरिटेज सेंटर

त्रिशक्ति कोर अपने सांस्कृतिक केंद्रों और संग्रहालयों के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों की सुंदरता को प्रदर्शित करके पर्यटन को भी बढ़ावा देता है। कोर ने सुकना में एक हेरिटेज सेंटर विकसित किया है, जो सिक्किम के इतिहास और समृद्ध वनस्पतियों और जीवों को प्रदर्शित करता है। स्थानीय आबादी के कल्याण के लिए त्रिशक्ति कोर की पहल को ऑपरेशन सद्भावना के तहत कल्याणकारी योजनाओं से और बढ़ावा मिला है। पहले ही वर्ष में, वाइब्रेंट विलेजेज सहित सीमावर्ती क्षेत्रों में 5.5 करोड़ रुपए से अधिक की कुल 68 कल्याणकारी परियोजनाएं लागू की गई हैं। अगले वर्ष के लिए भी ऐसी कई परियोजनाओं की योजना बनाई गई है।
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प्राकृतिक आपदा में सेना रहती है सबसे आगे

प्राकृतिक आपदा या चुनौतीपूर्ण मौसम की स्थिति से उत्पन्न किसी भी आपात स्थिति के दौरान सैनिक हमेशा बचाव अभियान में सबसे आगे रहते हैं। 23 अक्टूबर को जीएलओएफ और उसके बाद के दौरान, सैनिकों ने एक सप्ताह से अधिक समय तक फंसे हुए स्थानीय लोगों और पर्यटकों की मदद करने, पर्यटकों को बचाने और कटे हुए क्षेत्रों में संचार और कनेक्टिविटी बहाल करने में प्रमुख भूमिका निभाई। हर मौसम में, अचानक बर्फबारी या भूस्खलन के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक फंस जाते हैं, जिसमें अपने स्थान और कुशल प्रतिक्रिया अभ्यास के कारण भारतीय सेना हमेशा पहली प्रतिक्रियाकर्ता बन जाती है और बचाव और राहत अभियान में नागरिक प्रशासन की सहायता करती है। भारतीय सेना हिमालय में सीमाओं की रक्षा करते हुए, पर्यटकों और स्थानीय आबादी को सहायता प्रदान करने में हमेशा सक्रिय रहती है। 
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