फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सेना का रिकॉर्ड, सियाचिन ग्लेशियर से हेलीकॉप्टर किया रिकवर, सालभर से फंसा था बर्फ में

Wed, 26 Dec 2018 11:42 AM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 10
dhruv helicopter
भारतीय सेना ने सियाचिन के ग्लेशियर में 18 हजार फीट ऊंचाई पर फंसे एक हेलीकॉप्टर को रिकवर कर विश्व कीर्तिमान बनाया है। सेना के पायलट और तकनीकी अधिकारियों ने सफलतापूर्वक ग्लेशियर में फंसे हेलीकॉप्टर को रिकवर किया है। पिछले 11 महीनों से फंसे हेलीकॉप्टर को जवानों की मदद से सुरक्षापूर्वक सियाचिन बेस कैंप लाया गया है। 
विज्ञापन

2 of 10
helicopter dhruv
बता दें कि इसी साल के शुरुआत में  एएलएच ध्रुव नाम का हेलीकॉप्टर 74 किलोमीटर लंबे ग्लेशियर में गश्ती पर था कि तभी इसमें खराबी आ गई थी और इसे पास के खांडा नाम की पोस्ट पर इमर्जेंसी लैंडिंग कराई गई थी। पायलट हेलीकॉप्टर को बर्फ पर लैंड कराने में सफल रहा था लेकिन वह उसे हेलिपैड तक नहीं पहुंचा सका था। 
विज्ञापन

3 of 10
helicopter dhruv
इसके बाद पूरी रात हो रही बर्फबारी की वजह से हेलीकॉप्टर खराब हो गया। सेना ने इसे रिकवर करने के प्रयास शुरू हुए, लेकिन जुलाई तक इसमें कोई सफलता नहीं मिली।

4 of 10
helicopter dhruv
पहली सफलता जुलाई के आखिरी सप्ताह में मिली, जब सेना के पायलट और तकनीकी कर्मचारियों की एक टुकड़ी, उसके कुछ हिस्सों को दुरुस्त करने और नए पार्ट्स डालने में सफल हुई। इसके बाद इसे सफलतापूर्वक सियाचिन ग्लेशियर बेस कैंप लाया गया। 

 
विज्ञापन

5 of 10
helicopter dhruv
आर्मी के पूर्व एविएशन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल पी के भराली ने बताया कि इस ऑपरेशन में शामिल पायलट और तकनीकी अधिकारियों को जानता हूं। उन्होंने कहा कि 18 हजार फीट की ऊंचाई से इस हेलीकॉप्टर को रिकवर करना अपनी तरह का विश्व कीर्तिमान है क्योंकि भारत उन कुछ देशों में से एक है, जो इतनी ऊंचाई पर हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करता है।
विज्ञापन

6 of 10
helicopter dhruv
सेना में इस्तेमाल किए जाने वाले चीता और चेतक भी 23 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ते हैं।  चेतक और चीता में फ्रांस की मशीनें हैं, यहां तक कि फ्रांस भी इतनी ऊंचाई पर इनका इस्तेमाल नहीं करता है, जहां गलती करने की संभावना न के बराबर होती है। 
विज्ञापन

क्या है हेलीकॉप्टर ध्रुव, क्या है इसकी खासियत 

7 of 10
helicopter dhruv
बता दें कि ध्रुव हेलिकॉप्टर एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर है। इसका उपयोग सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान भी किया गया था। भारतीय सेना ने जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जब पाकिस्तान के सात आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना ने हमला बोला था तब ध्रुव ने अहम भूमिका निभाई थी।

यह पहलीबार था जब भारतीय सेना ने हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड में बने किसी हेलिकॉप्टर का उपयोग आक्रामक ऑपरेशन के लिए किया था। इसका सबसे पहले उपयोग 20 अगस्त 1992 में हुआ था, उसके बाद दुबारा 2002 में ध्रुव ऑपरेशन में आया। 

 

8 of 10
helicopter dhruv
बता दें कि ध्रुव सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले अन्य हेलीकॉप्टरों जैसे चीता और चेतक से अधिक महत्वपूर्ण है, और जल्द ही पोल स्टार हेलिकॉप्टर मॉडल इन मॉडलों को बदलने वाला है। सर्जिकल स्ट्राइक में उपयोग किए जाने वाले ध्रुव जैसे हेलिकॉप्टर अधिक मात्रा में भारतीय सेना में प्रयोग की योजना सेना बना रहा है।

बता दें कि चीता और चेतक भारतीय सेना के द्वारा उपयोग किए जा रहे हेलीकॉप्टर एक इंजन लगा है जबकि ध्रुव में शक्ति टर्बोशाफ्ट और 1341 बीएचपी शक्ति का इंजन लगा है। यह इतना शक्तिशाली है कि 290 किलोमीटर प्रति घंटे के हिसाब से उड़ता है। इसका वजन तीन टन है। 

 

9 of 10
helicopter dhruv
इसे हाई एल्टीट्यूड पर किसी भी स्थिति में उड़ने का सक्षम बनाया गया है। एचएएल के मुख्य पायलट उन्नी नायर ने बताया कि ध्रुव एक समय में कई तरह के काम कर सकता है जैसे पोलिसिंग, शहरी इलाकों में नजर रखने के साथ-साथ यह मेडिकल एंबुलेंस के भी काम का सकता है. 

 
विज्ञापन

10 of 10
helicopter dhruv
इसमें अलार्म सिस्टम के साथ साथ ऑटोमैटिक कॉफ और फ्लारे डिस्पेंसर भी है। वहीं इसमें कंपन को नियंत्रण में रखने की तकनीकी से लैस किया गया है। साथ ही इसमें उच्च तकनीक की संचार प्रणाली का भी उपयोग किया जा रहा है। यह सारी तकनीक बंगलूरू स्थित एचएएल के ऑफिस में किया जा रहा है। इसकी कीमत 40 करोड़ रुपये है।

इसमें 8 एंटी टैंक गाइड मिसाइल, 4 एयर टू एयर मिसाइल और 4x68 एमएम रॉकेट पॉड्स के साथ दो एंटी शिप मिसाइल भी लगाई जा सकती है। फिलहाल भारतीय सेना और वायु सेना के पास 76 हेलीकॉप्टर हैं। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें