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भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख में आर-पार की जंग के लिए तैयार, जानें अब तक क्या कुछ हुआ

Thu, 17 Sep 2020 04:27 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली/जम्मू/लद्दाख।

सार

  • उत्तरी कमान ने कहा, बातचीत से मसला हल न हुआ तो हम लंबे गतिरोध के लिए भी तैयार
  • चीन ने युद्ध छेड़ा तो मुकाबला अनुभवी, और मनोवैज्ञानिक रूप मजबूत भारतीय सैनिकों से होगा
  • शीर्ष स्तर पर सहमति के बावजूद सैन्य कमांडरों की वार्ता की तारीख तय करने में आनाकानी
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कश्मीर के गांदरबल जिले में श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का एक जवान। - फोटो : PTI
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विस्तार
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पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी तनाव के बीच भारतीय सेना ने कहा कि वह सर्दी में भी आर-पार की जंग के लिए पूरी तरह तैयार है। अगर चीन  ने युद्ध के हालात पैदा किए तो उसे उच्च प्रशिक्षित, बेहतर ढंग से तैयार और मनोवैज्ञानिक रूप से मजबूत भारतीय सैनिकों का सामना करना पड़ेगा।

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सेना की उत्तरी कमान ने बुधवार को कहा, अधिकतर चीनी सैनिक शहरी इलाकों से हैं। वे जमीनी दिक्कतों से वाकिफ नहीं होते और न लंबे समय तक तैनात रहने के आदी होते हैं। चीन की नीति हमेशा बिना लड़े युद्ध जीतने की रही है। ऐसे में युद्ध की स्थिति बनी तो उन्हें मुकाबला मजबूत भारतीय सैनिकों से होगा।

उत्तरी कमान के प्रवक्ता ने कहा, भारत पड़ोसियों से अच्छे संबंध चाहता है। संवाद से समाधान को तरजीह देता है। सीमा विवाद पर चीन से वार्ता जारी है। जहां तक सेना की बात है तो वह लंबे गतिरोध के लिए तैयार है।
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उत्तरी कमान ने यह बातें चीन की सरकारी मीडिया ‘ग्लोबल टाइम्स’ की उस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहीं जिसमें कहा गया था कि भारत सर्दियों में प्रभावी ढंग से लड़ाई नहीं लड़ पाएगा। उत्तरी कमान के प्रवक्ता ने कहा, यह दंभ का जीता जागता उदाहरण है।

सर्दी में युद्ध का बेमिसाल अनुभव
प्रवक्ता ने कहा, लद्दाख में नवंबर के बाद 40 फु ट तक बर्फ जमती है और तापमान शून्य से 30 से 40 डिग्री नीचे गिर जाता है। हालांकि भारतीय सैनिकों के पास भीषण सर्दी में युद्ध का बेमिसाल अनुभव है। भारत के पास दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन का अनुभव है जहां चीन से लगी सीमा के मुकाबले हालत बहुत मुश्किल हैं।

भारतीय सेना ने भी बढ़ाए संसाधन
प्रवक्ता ने कहा, अग्रिम मोर्चों पर लॉजिस्टिक क्षमता, गतिशीलता, निवास, अच्छी स्वास्थ्य सेवा, विशेष राशन, उच्च गुणवत्ता के हथियार, गोला-बारूद, कपड़ों आदि का पहले अभाव था। हालांकि चीन की आक्रामकता बढ़ने के बाद इस वर्ष मई से संसाधन बढ़ा दिए गए हैं।

हवाई ठिकानों से सेना से बेहतर संपर्क संभव
पहले लद्दाख जाने के लिए दो रास्ते थे जो जोजिला और रोहतांग दर्रे से होकर जाता है। हाल ही में दारचा से लेह तक तीसरी सड़क बनी, जिसके बंद होने का खतरा कम है। रोहतांग मार्ग पर अटल सुरंग पूरी होने से क्षमता कई गुना बढ़ गई है। इसके अलावा बड़ी संख्या में हवाई ठिकानों से हम सेना के साथ अच्छी तरह से संपर्क बनाए रख सकते हैं।

गोला-बारूद और विशेष ईंधन का पर्याप्त स्टॉक
प्रवक्ता ने कहा, टैंक और बख्तरबंद कर्मियों के वाहन के लिए विशेष ईंधन का पर्याप्त स्टॉक है। सैनिकों और जानवरों के लिए जगह-जगह पर नलकूप और बैरक बनाए गए हैं जो आरामदायक और गर्म हैं। छोटे हथियारों, मिसाइलों, टैंक और तोपखाने गोला-बारूद सहित तैयार हैं। विभिन्न प्रकार के गोला बारूद का भी पर्याप्त स्टॉक किया गया है।

तनाव के बीच बोफोर्स तोप तैयार रही है भारतीय सेना
भारतीय सेना एलएसी पर किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयारियों को पुख्ता करने में जुटी है। इसी क्रम में सेना ने एलएसी पर तैनाती के लिए बोफोर्स होवित्जर तोपों को तैयार करना शुरू कर दिया है। लद्दाख में सेना के इंजीनियर 155 एमएम की इन तोपों की सर्विसिंग कर रहे हैं।

80 के दशक में सेना की ऑर्टिलरी रेजिमेंट में शामिल बोफोर्स तोप लो और हाई एंगल दोनों से मार करने में सक्षम हैं। सर्विसिंग पूरी होते ही इन्हें लद्दाख में तैनात किया जाएगा। इस बीच, वायु सेना लद्दाख के अग्रिम मोर्चों तक जरूरी सामान पहुंचाने की तैयारी को अंतिम रूप दे रही है।

भारत-चीन के बीच फिर सैन्य व कूटनीतिक वार्ता होगी : सरकार

केंद्र सरकार ने कहा है कि चीन से जारी सीमा विवाद समाधान के लिए फिर सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर वार्ता शुरू होगी। बुधवार को विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया, हाल ही में भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच बनी सहमति के मुताबिक वार्ता शुरू होगी। 

उन्होंने बताया, दोनों पक्षों के शीर्ष कमांडर छह जून की बैठक में इस बात पर सहमत हुए थे कि दोनों देश सीमा से सेना पीछे हटाएंगे। हालांकि चीन ने इस सहमति का उल्लंघन करते हुए एलएसी पर यथास्थिति में बदलाव की एकतरफा कोशिश की।

इसके चलते 15 जून की रात दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। इसमें दोनों पक्षों के सैनिकों की जान गई। अगर सैन्य कमांडरों की बैठक में बनी सहमति का चीन पालन करता तो इसे टाला जा सकता था। 

मॉस्को में विदेश मंत्रियों की मुलाकात के बाद चीन ने सीमा पर अलर्ट घटाया
पूर्वी लद्दाख में एलएएसी पर फायरिंग के बाद बढ़े सैन्य अलर्ट को चीन ने घटा दिया है। ऐसा हाल ही में मॉस्को में हुई भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद किया गया। करीब साढ़े चार दशक में पहली बार बीते हफ्ते एलएसी पर फायरिंग के बाद चीन ने सैन्य तैनाती बढ़ा दी थी।

इतिहास में दूसरी बार चीन ने तैनाती इतनी बढ़ाई थी। इसके तहत हथियारों, सैन्य संसाधनों तथा सैनिकों की तैनाती बढ़ाने के साथ ही युद्धाभ्यास बढ़ाया गया। यह चीनी सैनिकों, कमांडरों और अफसरों को तैयार करने के लिए किया। इससे पहले चीन ने 1987 में सेना और सैन्य संसाधनों की तैनाती इतनी बढ़ाई थी।

तब अरुणाचल प्रदेश की समदोरांग झू घाटी में भारत और चीन के सैनिकों की झड़प के बाद युद्ध के हालात बन गए थे। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी में सैन्य तैयारी के चार ग्रेड हैं। पहले ग्रेड का इस्तेमाल तभी होता है जब सैन्य संघर्ष अपरिहार्य हो जाता है।

24 घंटे सक्रिय हो जाती है सेना
तैयारी का अलर्ट लेवल बढ़ने के बाद अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैन्य टुकड़ी 24 घंटे सक्रिय रहती है। प्रशिक्षण और ड्रिल बढ़ा दी जाती है। इसी क्रम ने बिगड़ते हालत से निपटने के लिए चीन ने एलएसी सैनिकों और सैन्य साजो सामान की तैनाती बढ़ा दी है। हालांकि पिछले हफ्ते मॉस्को में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी की मुलाकात के बाद पीएलए ने अलर्ट घटा दिया था।

लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर 20 दिन में तीन बार हुई फायरिंग
एलएसी पर पिछले 45 वर्ष में एक भी गोली नहीं चली लेकिन चार महीने से जारी सीमा विवाद के बीच स्थिति बदल गई है। पिछले 20 दिन में पूर्वी लद्दाख में दोनों सेनाओं के बीच कम से कम तीन बार फायरिंग हुई है।

सैन्य सूत्रों के मुताबिक पहली घटना 29 से 31 अगस्त के बीच तब हुई जब चीनी सैनिकों ने पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर पर ऊंचाई वाली जगह कब्जा करने की कोशिश की, जिसे भारत ने नाकाम कर दिया। वहीं, सात सितंबर को मुखपरी चोटी पर गोली चली। फिर आठ सितंबर को पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर फायरिंग हुई। इस दौरान, दोनों सेनाओं ने 100 राउंड से ज्यादा फायरिंग की। चीनी सेना के आक्रामक रुख के कारण यह फायरिंग हुई थी।

चीन की चालबाजी के चलते भारत ने बढ़ाई अतिरिक्त चौकसी

पूर्वी लद्दाख में चार महीने से जारी विवाद के समाधान के लिए शीर्ष स्तर पर जारी बातचीत के बावजूद चीन की चालबाजी को देखते हुए भारत पूरी तरह अलर्ट है। विवाद सुलझाने के लिए सैन्य कमांडरों की बातचीत की तारीख तय करने में चीन की आनाकानी को देखते हुए भारत ने एलएसी और पाकिस्तान सीमा पर अतिरिक्त चौकसी बढ़ा दी है।

इस बीच, पूर्वी लद्दाख में सैन्य बढ़त के लिए भारत बोफोर्स तोप तैनात करने की भी तैयारी कर रहा है। सीमा विवाद के समाधान के लिए बीते दिनों भारत और चीन के रक्षा मंत्रियों तथा विदेश मंत्रियों की बातचीत के बावजूद चीन सैन्य कमांडरों की वार्ता की तारीख नहीं तय कर रहा है।

इसके चलते भारत भी सैन्य तैयारी में कसर नहीं छोड़ना चाहता। पिछले 20 दिनों में एलएसी पर कम से कम तीन बार फायरिंग हुई है। सूत्रों के मुताबिक ताजा घटनाक्रमों के बीच सबसे बड़ी चिंता यह है कि सैद्धांतिक सहमति के बावजूद चीन ने अब तक सैन्य वार्ता की तारीख नहीं तय की है।

दोनों देशों में सहमति के मुताबिक इस हफ्ते की शुरुआत में ही कमांडर स्तर की वार्ता होनी थी। इससे पहले दोनों देशों के सैन्य कमांडर आखिरी बार दो अगस्त को मिले थे। 

पहले से कमजोर हो गई चीन की स्थिति
जानकारों के मुताबिक या तो चीन अभी वार्ता का एजेंडा तय कर रहा है या 29-30 सितंबर की रात भारतीय सेना की कार्रवाई की जांच कर रहा है। उस रात चीन ने पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे भारतीय इलाके में घुसपैठ की कोशिश की थी, जिसे भारतीय सैनिकों ने नाकाम कर दिया था। तब दोनों ओर से चेतावनी फायरिंग हुई।

इसके बाद भारत ने इस इलाके की महत्वपूर्ण चोटियों पर अपनी स्थिति और मजबूत कर ली। इसके बाद चीन पहले जैसी स्थिति में नहीं रहा गया है। पैंगोंग के दक्षिणी किनारे सामरिक मजबूती के बाद यहां भारत का पलड़ा भारी हो गया है। ऐसे बातचीत से पहले चीन यह मंथन कर रहा होगा कि क्या और कैसे बात करनी है।
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छह महीने में भारत-चीन सीमा पर कोई घुसपैठ नहीं: सरकार

केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद में बताया, पिछले छह महीने में भारत-चीन सीमा पर कोई घुसपैठ नहीं हुई। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया, तीन महीने में भारत-पाकिस्तान सीमा पर 47 बार घुसपैठ के प्रयास हुए।

जबकि बीते तीन वर्ष में पाकिस्तानियों ने 594 बार सीमा पार करने की कोशिश की, जिसमें 312 घुसपैठ हुई। उन्होंने बताया, सरकार ने घुसपैठ रोकने के लिए कई स्तर पर प्रयास किए हैं। इसमें नियंत्रण रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ाना भी शामिल है। एजेंसी

भारत-अमेरिका रक्षा उपकरणों के सह विकास उत्पादन पर करेंगे चर्चा
भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा अधिकारियों ने बुधवार को रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन और सह-विकास सहित रक्षा औद्योगिक सहयोग पर चर्चा करने के लिए एक आभासी बैठक आयोजित की।

अमेरिकी विदेश विभाग के ब्यूरो ऑफ साउथ एंड सेंट्रल एशियन अफेयर्स ने कहा कि अमेरिका, भारत रक्षा साझेदारी अमेरिका-भारत व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की आधारशिला है। अमेरिका और भारत के वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग पर चर्चा करने के लिए मुलाकात की, इसमें रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन और सह-विकास शामिल हैं।

भारत के साथ सीमा पर शांति व स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध : चीन
एलएसी पर लगातार आक्रामक और भड़काऊ रवैया अपना रहे चीन ने दावा किया है कि वह भारत के साथ हुए समझौतों और सहमति का सम्मान करता है। साथ ही सीमा पर शांति और स्थिरता बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन मंगलवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के लोकसभा में दिए बयान पर सवाल का जवाब दे रहे थे। वांग से राजनाथ के उस बयान पर टिप्पणी मांगी गई थी जिसमें उन्होंने कहा था कि चीन एलएसी पर विवाद वाली जगहों से सेना हटाने को तैयार नहीं है।

वांग ने कहा, हम भारत से हुए समझौतों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम शांति और स्थिरता चाहते हैं लेकिन अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता भी सुनिश्चित करेंगे।
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