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पाकिस्तानियों ने बिछाया 'मौत का जाल', ऐसे फंसाया हमारे जवानों को

Tue, 02 May 2017 08:55 AM IST
amarujala.com- Presented by: जया पाण्डेय
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शहीद परमजीत सिंह के परिवार वाले
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भारतीय सेना के गश्ती दल के दो सदस्यों की हत्या सोमवार को पाकिस्तानी विशेष बलों ने कर दी थी और उनका शव क्षत-विक्षत कर दिया। इस मामले में एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि पाकिस्तानी सेना ने मौत का जाल बिछाया था जिसमें हमारे सैनिक फंस गए। 
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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक जम्मू और कश्मीर में नियंत्रण रेखा के किनारे कृष्णा घाटी सेक्टर में ये घटना तब हुई जब सेना और बीएसएफ की एक संयुक्त टीम एक खुफिया रिपोर्ट की सच्चाई की जांच करने जा रही थी कि पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय भूमि पर सुरंग बम फिट किया है। 
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पेट्रोलिंग के दौरान ही पाकिस्तानी बॉर्डर एक्शन टीम(बैट) ने उनपर हमला कर दिया। पाकिस्तानी टीम भारतीय क्षेत्र के 250 मीटर अंदर तक घात लगाकर बैठी हुई थी। बैट ने भारतीय दल को निशाना बनाने के लिए जाल बिछाया था। 
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भारतीय सैनिकों ने उन पर रॉकेट और मोर्टार से हमला किया जबकि पाकिस्तानी दल ने उनके लक्ष्य का इंतजार किया। पाकिस्तानी सैनिकों के गोलीबारी से 2 भारतीय सैनिक शहीद हो गए। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बैट के निशाने पर सात से आठ सदस्यीय गश्ती दल था जो चौकी से बाहर आया था।

गौरतलब है कि सोमवार सुबह जम्मू-कश्मीर में एलओसी से सटी बीएसएफ की अग्रिम पोस्ट पर पाकिस्तान की ओर से सीजफायर का उल्लंघन किया गया। पाकिस्तान की ओर से पुंछ जिले के केजी सेक्टर में सोमवार सुबह करीब 8.30 बजे रॉकेट लांचर और ऑटोमेटिक हथियारों से गोलाबारी की गई। 

पाकिस्तान की ओर से हुई इस गोलाबारी के दौरान भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने भी ताबड़तोड़ जवाबी कार्रवाई की। पाकिस्तान की ओर से हुई गोलाबारी के जवाबी कार्रवाई में भारतीय सुरक्षाबलों के 2 जवान शहीद हुए जबकि एक अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हुआ।
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पाकिस्तान की ओर से बैट टीम की जवानों के साथ बर्बरता कई बार पहले भी की जा चुकी है। साल 1999 में पाक सेना करगिल युद्ध के दौरान कैप्टन के शव के साथ भी बर्बरता की गई थी। इसके बाद फरवरी 2000 में मराठा रेजिमेंट के जवान भाव साहेब मारुति कालेकर के शव के साथ पाकिस्तान सैनिकों ने बर्बरता की।

इसके बाद साल 2008 में गोरखा रेजिमेंट का एक जवान रास्ता भटक कर एलओसी के पार पहुंच गया था। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने ना सिर्फ उन्हें प्रताड़ित किया बल्कि उनके शव के साथ भी बर्बरता की।
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