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Indian Army: भारतीय सेना ने बनाया 'अग्निअस्त्र', आतंक विरोधी अभियानों में आतंकियों का बनेगा काल!

हरेंद्र चौधरी
Updated Fri, 23 Aug 2024 08:50 PM IST

सार

भारतीय सेना ने आतंकवादियों को उनके ठिकाने पर घुस मारने के लिए दो खतरनाक हथियार लेकर आ रही है। भारतीय सेना ने अपनी जरूरतों को देखते हुए दो 'अस्त्रों' को खुद ही डिजाइन किया है। जिसके बाद आतंकियों को मार गिराने का काम ये दोनों 'हथियार' करेंगे।  
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भारतीय सेना ने बनाया 'अग्निअस्त्र' - फोटो : अमर उजाला
भारतीय सेना को निशाना बनाने वाले आतंकी अब बच नहीं सकेंगे। भारतीय सेना आतंकवादियों को उनके ठिकाने पर घुस मारने के लिए दो खतरनाक हथियार लेकर आ रही है। कई बार आतंकी हमला करने के बाद किसी घर में घुस जाते हैं, जिसके बाद उन्हें 'ठिकाने' के लिए जवानों को ग्रैनेड या हथियार लेकर घर के अंदर घुसना पड़ता है, जो न केवल जान जोखिम में डालने वाला होता है, बल्कि उसके लिए काफी तैयारियां भी करनी पड़ती हैं। वहीं, भारतीय सेना ने अपनी जरूरतों को देखते हुए इन दो 'अस्त्रों' को खुद ही डिजाइन किया है। जिसके बाद आतंकियों को मार गिराने का काम ये दोनों 'हथियार' करेंगे। 

सेना के लिए निजी कंपनी बनाएगी ये प्रोडक्ट
भारतीय सेना ने अपनी जरूरतों को देखते हुए दो नए इनोवेशंस किए हैं। इनमें एक 'एक्सप्लोडर' और दूसरा 'अग्निअस्त्र' है। ये दोनों इनोवेशंस आर्मी डिजाइन ब्यूरो ने आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर डेवलप किए हैं। वहीं, भारतीय सेना के लिए इन दोनों प्रोडक्ट्स को निजी कंपनी बनाएगी। भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने इन दोनों इनोवेसंस को शुक्रवार को सैन्य बलों के इस्तेमाल को लेकर बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के लिए टेक्नोलॉजी ऑफ ट्रांसफर (टीओटी) प्रक्रिया के तहत निजी कंपनी को सौंपा। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) प्रक्रिया में आईआईटी दिल्ली के फाउंडेशन ऑफ इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की अहम भूमिका रही है। 

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भारतीय सेना ने बनाया 'अग्निअस्त्र' - फोटो : अमर उजाला
भारतीय सेना को निशाना बनाने वाले आतंकी अब बच नहीं सकेंगे। भारतीय सेना आतंकवादियों को उनके ठिकाने पर घुस मारने के लिए दो खतरनाक हथियार लेकर आ रही है। कई बार आतंकी हमला करने के बाद किसी घर में घुस जाते हैं, जिसके बाद उन्हें 'ठिकाने' के लिए जवानों को ग्रैनेड या हथियार लेकर घर के अंदर घुसना पड़ता है, जो न केवल जान जोखिम में डालने वाला होता है, बल्कि उसके लिए काफी तैयारियां भी करनी पड़ती हैं। वहीं, भारतीय सेना ने अपनी जरूरतों को देखते हुए इन दो 'अस्त्रों' को खुद ही डिजाइन किया है। जिसके बाद आतंकियों को मार गिराने का काम ये दोनों 'हथियार' करेंगे। 

सेना के लिए निजी कंपनी बनाएगी ये प्रोडक्ट
भारतीय सेना ने अपनी जरूरतों को देखते हुए दो नए इनोवेशंस किए हैं। इनमें एक 'एक्सप्लोडर' और दूसरा 'अग्निअस्त्र' है। ये दोनों इनोवेशंस आर्मी डिजाइन ब्यूरो ने आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर डेवलप किए हैं। वहीं, भारतीय सेना के लिए इन दोनों प्रोडक्ट्स को निजी कंपनी बनाएगी। भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने इन दोनों इनोवेसंस को शुक्रवार को सैन्य बलों के इस्तेमाल को लेकर बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के लिए टेक्नोलॉजी ऑफ ट्रांसफर (टीओटी) प्रक्रिया के तहत निजी कंपनी को सौंपा। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) प्रक्रिया में आईआईटी दिल्ली के फाउंडेशन ऑफ इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की अहम भूमिका रही है। 

आतंक विरोधी अभियानों में आतंकियों का बनेगा काल! - फोटो : अमर उजाला
4 साल में सेना के लिए किए 10 इनोवेशंस
खास बात यह है कि आर्मी डिजाइन ब्यूरो के साथ भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स के मेजर राजप्रसाद ने अहम भूमिका निभाई है। अमर उजाला से खास बातचीत में मेजर राजप्रसाद आरएस ने बताया कि वे खुद एमटेक हैं और टेक्निकल बैकग्राउंड से आते हैं। वह बताते हैं कि इनोवेशंस लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया है। वे पिछले 4 साल में सेना के लिए 10 इनोवेशंस कर चुके हैं। जिनमें से 4 सेना में इंडक्ट भी हो चुके हैं। वह बताते हैं कि स्टार्टअप इकोसिस्टम अच्छी चीज है, लेकिन उन्हें हमारी जरूरतों के बारे में जानकारी नहीं है। उनके पास स्किल्स हैं लेकिन जब तक जरूरतों के बारे में नहीं पता होगा, तो प्रोडक्ट बेहतर नहीं बन पाएगा। उन्होंने एक्सप्लोडर और अग्निअस्त्र से पहले सेना के लिए एक जनरेटर विद्युत रक्षक, और वायरलेस इलेक्ट्रॉनिक डिटेक्शन सर्विस (डब्ल्यूईडीएस) भी बनाया है, जिन्हें सेना में शामिल किया जा चुका है। 

भारतीय सेना ने बनाया 'अग्निअस्त्र' - फोटो : अमर उजाला
आईईडी का पता लगाएगा एक्सप्लोडर
उन्होंने बताया कि एक्सप्लोडर, एक एडवांस मानवरहित ग्राउंड व्हीकल (यूजीवी) है। जिसमें छह पहिये लगे हैं। इसकी ऊंचाई भी मात्र डेढ़ फीट है। इसे कॉम्बैट और ऑपरेशनल रोल्स के लिए डिजाइन किया गया है। वहीं, यह किसी भी तरह की जमीन पर चल सकता है। इसकी खूबी है कि यह दूर से इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) को ढूंढ कर उसे उड़ा सकता है। इसके अलावा इसे रिमोट से कंट्रोल किया जा सकता है। इसकी रेंज वायर के साथ 2 किमी और वायरलेस 2.5 किमी है। इसमें एक सेल्फ डेस्ट्रक्शन मोड भी है, जरूरत पड़ने पर यह खुद को भी उड़ा सकता है। उन्होंने बताया कि इसका ट्रायल पूरा हो चुका है और काफी कारगर रहा है। इसे आपदा राहत कार्यों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसे डिफेंस एक्सपो में भी शोकेस किया गया था और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसकी तारीफ की थी। 

आतंकियों को घुस कर मारेगा अग्निअस्त्र 
मेजर राजप्रसाद आरएस ने आगे बताया कि इसके अलावा अग्निअस्त्र नाम से उनका दूसरा इनोवेशन भी है। इसे भी टेक्नोलॉजी ऑफ ट्रांसफर के तहत निजी कंपनी सेना के लिए उत्पादन करेगी। अपने नाम के अनुरूप अग्निअस्त्र की खूबियां बताते हुए वह कहते हैं कि यह मल्टी टारगेट पोर्टेबल डेटोनेशन सिस्टम है। इसकी रेंज 10 किमी है। मल्टी-टारगेट रिमोट-कंट्रोल्ड ब्लास्टर यानी अग्निअस्त्र का उद्देश्य उग्रवाद और आतंकवाद विरोधी अभियानों में उपयोग करना है और इसका उद्देश्य बारूदी सुरंगों और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) को निष्क्रिय करने में मानवीय हस्तक्षेप को कम करना है। उन्होंने बताया कि अग्निअस्त्र आतंकी हमलों के दौरान सैन्य अभियानों में सेना का नेतृत्व करने वाले प्लाटून कमांडरों की जरूरतों को पूरा करेगा।

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