अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ को रोकने के लिए भारतीय सेना ने एआई तकनीक का सफल इस्तेमाल किया था। एआई समिट में सैन्य अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एआई की मदद से चीनी सैनिकों के आने के समय का सटीक अनुमान लगाया, जिससे सेना ने समय रहते उन्हें रोक दिया।
एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल डीएस राणा, सी-इन-सी, स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड, (इंडियन आर्मी) ने 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना की घुसपैठ रोकने में बड़ी भूमिका निभाई। यह घटना उस समय की है जब वह तवांग और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
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सैन्य अधिकारी ने क्या कहा?
अधिकारी के अनुसार, उनके पास उस समय कम क्षमता वाला एक छोटा एआई सॉफ्टवेयर था। चीन ने तवांग के पास 'यांगत्से' इलाके में घुसपैठ की कोशिश की थी। यह एक विवादित क्षेत्र है जो भारत के नियंत्रण में है। इस दौरान एआई सिस्टम ने वहां हो रही संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी। एआई की मदद से सेना यह अंदाजा लगाने में सफल रही कि चीनी सैनिक कब और किस तरफ से आगे बढ़ रहे हैं।
इस सटीक जानकारी की वजह से भारतीय सेना ने अपने संसाधनों और जवानों को सही समय पर सही जगहों पर तैनात कर दिया। सेना ने समय रहते जरूरी कदम उठाए और चीन की इस बड़ी कोशिश को पूरी तरह नाकाम कर दिया। सबसे बड़ी बात यह रही कि इस पूरे ऑपरेशन में भारतीय पक्ष का कोई भी जवान हताहत नहीं हुआ।
सेना को मिले 19 वीरता पुरस्कार
अधिकारी ने बताया कि इस सफल ऑपरेशन के लिए सेना को 19 वीरता पुरस्कार मिले। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई और भविष्यवाणी करने वाले तकनीकी उपकरण युद्ध के मैदान में बहुत असरदार साबित हो सकते हैं। यह तकनीक न केवल घुसपैठ रोकने में मदद करती है, बल्कि जवानों की जान बचाने में भी अहम भूमिका निभाती है।