भारतीय सेना क्षमताओं को बढ़ाने के लिए उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित निगरानी प्रणाली को तैनात कर रही है।
रक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े सूत्रों ने पुष्टि की है कि एआई-आधारित निगरानी प्रणाली को सीमाओं पर तैनात करने के अलावा वे इसका उपयोग रीयल-टाइम सोशल मीडिया निगरानी, पैटर्न मान्यता और प्रतिकूल कार्रवाई की भविष्यवाणी आदि पर नजर रखने के लिए भी कर रहे हैं।
एक सूत्र ने कहा, "आंतक रोधी अभियानों में खुफिया जानकारी जुटाने के लिए एआई-आधारिरत रियल टाइम निगरानी सॉफ्टवेयर तैनात किया गया है। एआई-आधारित संदिग्ध वाहन पहचान प्रणाली को उत्तरी और दक्षिणी थिएटर में आठ स्थानों पर तैनात किया गया है।"
सूत्र ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सैन्य अभियानों के दौरान विषम परिस्थितियों को बदल सकती हैं। एआई के उपयोग से युद्ध लड़ने के तरीकों में बदलाव आएगा। एआई एप्लिकेशन का उपयोग निगरानी और पता लगाने, रीयल-टाइम की सोशल मीडिया निगरानी, पैटर्न की पहचान और प्रतिकूल कार्रवाई की भविष्यवाणी आदि के लिए किया जा सकता है।
सीमाओं पर 5जी नेटवर्क की कनेक्टिविटी चाहती है सेना
इसके अलावा ऑपरेशनल जरूरतों को सपोर्ट करने के लिए भारतीय सेना मजबूत कम्युनिकेशन और हाई स्पीड डाटा नेटवर्क स्थापित करना चाहती है। सेना सीमाओं पर 5जी नेटवर्क स्थापित करना चाहती है।
चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बेहतर कम्युनिकेशन के लिए 5जी नेटवर्क स्थापित करना शुरु कर दिया है।
रक्षा मंत्रालय ने टेंडर में संशोधन को दी मंजूरी
वहीं भारतीय नौसेना के लिए छह नई पनडुब्बियों के निर्माण के लिए 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर के सौदे को आगे बढ़ाने के लिए बाधाओं को दूर करते हुए रक्षा मंत्रालय ने चल रहे टेंडर में संशोधन के लिए मंजूरी दे दी है जो परियोजना को आगे बढ़ने की अनुमति देगा।
भारतीय नौसेना ने प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय को एक प्रतिबद्धता दी है कि पनडुब्बियों की अगली कतार भारत में डिजाइन की जाएगी और निर्यात के लिए भी मंजूरी दी जाएगी।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि हाल ही में रक्षा मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय बैठक में टेंडर में संशोधन के लिए मंजूरी दी गई थी। ये टेंडर को स्वदेशी पनडुब्बी निर्माण के लिए आगे बढ़ने की अनुमति देंगे।