जानकारी के मुताबिक गलवां घाटी और पेंगोंग त्सो के आसपास चीन ने अस्थायी निर्माण के साथ अपने सैनिकों की संख्या पांच हजार तक बढ़ा दी है। इस इलाके में चीन ने 100 से ज्यादा टेंट लगाए हैं और बंकर निर्माण के लिए भारी मशीनें लगाई हैं। इसके चलते भारत भी लगातार सैनिकों तैनाती और गश्त बढ़ा रहा है।
कम से कम तीन संवेदनशील स्थानों पर दोनों सेना आमने-सामने हैं। दोकलम के बाद दोनाें देशों के बीच जारी सबसे बड़े विवाद से निपटने के लिए पांच दौर की बात बेनतीजा रही है। एक शीर्ष सैन्य अधिकारी ने बताया, अभी कोई कामयाबी नहीं मिली। यथास्थिति बरकरार है। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि यह मुद्दा सुलझाया जाएगा।
शीर्ष सैन्य कमांडरों की कॉन्फ्रेंस आज से
शीर्ष सैन्य कमांडरों की बुधवार से शुरू हो रही कॉन्फ्रेंस में चीन से जारी विवाद पर भी मंथन होगा। इस दौरान जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात पर भी चर्चा होगी। सैन्य प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने बताया, शीर्ष सैन्य नेतृत्व सुरक्षा और प्रशासन से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों और भविष्य में उनसे निपटने पर मंथन करेगा।
चीन की सेना खुद को पेशेवर होने का लाख दावा करे लेकिन पैंगोग त्से में उसकी पोल खुल गई। पिछले दिनों पूर्वी लद्दाख के पैंगोग त्सेे झील के पास झड़प के दौरान उसके सैनिकों ने भारतीय जवानों पर डंडों, कंटीले तारों और पत्थरों से हमला किया। जानकारों के मुताबिक चीनी सेना का यह व्यवहार पाकिस्तान समर्थित उन पत्थरबाजों जैसा था, जैसा कश्मीर घाटी में सेना के जवानों के खिलाफ होता है।
सूत्रों ने के मुताबिक लद्दाख क्षेत्र में चीनी सेना के जवानों ने गैरपेशेवराना हरकत की। झड़प के दौरान चीनी सैनिक संख्या बल में भारतीय जवानों से ज्यादा थे, लेकिन गैरपेशेवर हरकत करते हुए नाहक उग्र तेवर दिखाए। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक भारत और चीनी सेना असॉल्ट रायफल से लैस हैं, लेकिन शांति बनाए रखने के लिए इस क्षेत्र में 1967 से अब तक गोलीबारी नहीं हुई है।
हाल की झड़प में चीन की सेना भारतीय जवानों को चारों ओर से घेरकर उकसावे की कार्रवाई करते हुए टिड्डियों के झुंड की तरह सीमा से सटे क्षेत्र में पहुंच गए। इसके उलट भारतीय सेना ने चीनी सेना को पीछे धकेलने के लिए कभी ऐसा हथकंडा नहीं अपनाया।