दरअसल एचसीक्यू को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कोरोना के इलाज में प्रभावी बताए जाने पर चर्चा मिली थी। इसके बाद आईसीएमआर ने एनआईवी पुणे, दिल्ली एम्स और तीन अन्य अस्पतालों के अध्ययन का हवाला देते हुए कोविड उपचार में इसे प्रभावी बताया है।
इस दवा को दो महीने पहले भारत से अमेरिका भी भेजा गया था। इसके बाद ट्रंप ने स्वयं दवा का सेवन करने की पुष्टि भी की थी। इस दवा को लेकर चीन, अमेरिका, यूके, जापान सहित दुनिया के कई देशों में अध्ययन शुरू हुए, लेकिन अभी भारत को छोड़कर बाकी जगह अध्ययनों के परिणाम एक समान मिले हैं।
देश की एक और कंपनी ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड ने भी मंगलवार को कहा कि वह कोरेना संक्रमण के इलाज की तलाश के लिए दो एंटी वायरल दवाओं फेविपीराविर और यूमीफेनोविर के कॉम्बिनेशन का नया चिकित्सकीय परीक्षण चालू करेगी। इसके लिए उसे दवा नियामक से अनुमति मिल चुकी है।
कंपनी ने कहा, इस अध्ययन के लिए देश के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कोविड-19 संक्रमण के मध्यम स्तर वाले 158 मरीजों को पंजीकृत करेगी। फेविपीराविर का निर्माण जापान की फ्यूजीफिल्म होल्डिंग्स कॉरपोरेशन द्वारा एविगान ब्रांडनेम के तहत किया जा रहा है।
इसे 2014 में एंटी-फ्लू दवा के तौर पर मंजूरी मिली थी। यूमीफेनोविर को कुछ प्रकार के संक्रमित बुखारों के इलाज लिए रूस और चीन में उत्पादित किया जाता है। ग्लेनमार्क पहले से ही फेविपीराविर से कोरोना संक्रमण के इलाज का चिकित्सकीय परीक्षण कर रही है, जिसके रिजल्ट जुलाई या अगस्त में आने हैं। कई अन्य देश भी इस दवा पर परीक्षण कर रहे हैं।