भारतीय सेना अपनी मारक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। रक्षा मंत्रालय जल्द ही 2,408 नाग मार्क-2 एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें और 107 नामिका ट्रैक्ड वाहन खरीदने की मंजूरी देने वाला है। यह पूरी तरह स्वदेशी प्रणाली है, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने विकसित किया है। यह सौदा भारत की आत्मनिर्भर भारत मुहिम के तहत रक्षा क्षेत्र में अब तक के सबसे अहम अनुबंधों में से एक माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, रक्षा अधिग्रहण परिषद की 23 अक्तूबर को होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की उम्मीद है। ये मिसाइलें भारत डायनेमिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित की जाएंगी। नाग मार्क-2 मिसाइल, अपने पिछले संस्करण की तुलना में अधिक सटीक, घातक और तकनीकी रूप से उन्नत है।
यह एक तीसरी पीढ़ी की ‘फायर एंड फॉरगेट’ मिसाइल है, जो टैंक को बिना किसी मार्गदर्शन के सीधा निशाना बनाती है। जनवरी 2025 में पोखरण रेंज में हुए फील्ड ट्रायल्स में इस मिसाइल ने अधिकतम और न्यूनतम रेंज में सभी लक्ष्यों को पूरी तरह नष्ट कर अपनी सटीकता साबित की थी।
आत्मनिर्भरता की दिशा में सेना का अभियान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लगातार स्वदेशी हथियार प्रणालियों को बढ़ावा दे रहे हैं। सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने भी कई मौकों पर कहा है कि भविष्य की जंग स्वदेशी हथियारों से ही जीती जाएगी। इसी दिशा में सेना कई आधुनिक प्रणालियों को शामिल कर रही है।
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इनमें नाग मार्क-2, ड्रोन आधारित वार सिस्टम और चौथी पीढ़ी की मिसाइलें शामिल हैं। सेना ने पहले ही अमेरिकी जैवेलिन एंटी-टैंक मिसाइलों के 12 लॉन्चर और 104 मिसाइलों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो आपातकालीन खरीद के तहत आ रही हैं।
आधुनिक कार्बाइन और ड्रोन युद्ध क्षमता में बढ़ोतरी
सेना के इंफैंट्री निदेशक जनरल लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार ने जानकारी दी कि भारतीय सेना ने 4.25 लाख क्लोज क्वार्टर कार्बाइन खरीदने का अनुबंध किया है। इन कार्बाइनों में 60 प्रतिशत आपूर्ति भारत फोर्ज लिमिटेड करेगी, जबकि शेष 40 प्रतिशत पीएलआर सिस्टम्स द्वारा दी जाएगी।
ये कार्बाइन अगले दो वर्षों में सेना को मिल जाएंगी। इसके अलावा सेना ने 380 इंफैंट्री बटालियनों में ड्रोन प्लाटून तैनात कर दिए हैं, जिन्हें ‘अशनि प्लाटून’ कहा गया है। इनमें निगरानी के लिए चार और हथियारबंद श्रेणी के छह ड्रोन शामिल हैं, जो कामिकाजे ड्रोन और प्रिसिशन अम्यूनिशन ड्रॉपिंग यूएवी के रूप में काम करेंगे।
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नई यूनिट्स और भविष्य की तैयारी
सेना ने अपनी युद्ध क्षमता को और प्रभावी बनाने के लिए ‘भैरव बटालियन’ नाम की नई यूनिट्स का गठन शुरू किया है। इनकी पहली बटालियन एक नवंबर को तैनाती के लिए तैयार होगी। कुल 25 भैरव बटालियनें अगले छह महीनों में तैयार की जाएंगी। इनमें प्रत्येक में लगभग 250 जवान होंगे जो विभिन्न शाखाओं इन्फैंट्री, आर्टिलरी, सिग्नल्स और एयर डिफेंस से चुने जाएंगे।
भैरव बटालियनें स्पेशल फोर्सेज और रेगुलर इंफैंट्री के बीच की खाई को पाटने का काम करेंगी। इसके अलावा सेना पुराने 5.56mm हथियारों को 7.62mm राइफलों से अपग्रेड कर रही है और 338 स्नाइपर राइफलें भी शामिल की जा रही हैं। सेना सभी मौसम में चलने वाले वाहनों, हल्के स्पेशल व्हीकल्स, बैटल फील्ड रडार और थर्मल इमेजिंग साइट्स को भी तेजी से शामिल कर रही है, ताकि सीमा पर हर परिस्थिति में जमीनी कमांडर तुरंत निर्णय ले सकें।