भारतीय सेना में जाबांजों की कमी नहीं है, जो रणनीति के मामले में दुश्मन के चाल पर भारी पड़ जाते हैं। 29-30 सितंबर की रात में लद्दाख के पैंगोंग क्षेत्र में दक्षिणी किनारे की ब्लैक टॉप, हेलमेट टॉप चोटियों पर कुछ ऐसा ही हुआ था। बताते हैं कि चीन की फौज ने इन दोनों चोटियों पर काबिज होने की योजना बनाई। इसकी भनक भारतीय सेना को लग गई और जब तक चीन की फौज वहां आती, कमांडिग ऑफिसर कर्नल रणबीर सिंह जामवाल (जिम्मी) की टीम ने वहां कब्जा जमा लिया। चीन के सैनिकों को भी कहा कि यह भारतीय क्षेत्र है, वहां यहां घुसपैठ की कोशिश न करें।
चुशुल के पास का यह क्षेत्र दोनों देशों की सेनाओं के बीच सतर्कता और तनातनी का मुख्य केंद्र बन गया है। सैन्य सूत्रों की मानें चीन ने भी टैंक, एंटी टैंक मिसाइल, तोप आदि से मजबूत मोर्चाबंदी की है। जवाब में भारत ने भी पूरी सैन्य तैयारी कर रखी है। कुल मिलाकर उद्देश्य चीन को आगे बढ़ने से रोकना और रक्षात्मक आक्रामक तरीका अपनाते हुए उसके किसी भी प्रयास का माकूल जवाब देना है।
बताते हैं टैंक, तोप, एंटी टैंक मिसाइल समेत सैन्य बेड़े को सपोर्ट देने के लिए तीनों सेनाओं ने बेहतर तालमेल बना रखा है। पैंगोंग में नौसेना की फास्ट ट्रैक बोट समेत अन्य किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। वहीं वायुसेना ने भी मुस्तैदी काफी बढ़ाई है।
पैंगोंग का सामरिक महत्व काफी ज्यादा है। भारतीय सेना जब भी चीन की फौज से इस क्षेत्र को को खाली करने, एलएसी का सम्मान करने की बात करती है, तो चीन की फौज अनसुना कर देती थी। यहां तक कि चीन के मेजर जनरल लियु लिन और लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह की वार्ता के दौरान चीन पैंगोंग और डेपसांग को लेकर कोई बात नहीं करता था।
ब्रिगेडियर (रिटा.) एमपीएस बाजवा काफी प्रभावित हैं। वह कर्नल जिम्मी को उनकी बहादुरी के लिए सेल्यूट करते हैं। बतौर ब्रिगेडियर बाजवा कर्नल जिम्मी की टीम ने बड़ी बहादुरी के साथ कालाटॉप, हेलमेट टॉप पर तिरंगा फहराया। ब्रिगेडियर के मुताबिक कर्नल जिम्मी हाई अल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल (HAWS) के इंट्रक्टर रह चुके हैं। वह तीन बार एवरेस्ट की ऊंची चोटियों पर पहुंचने में सफल हो चुके हैं।
इस क्षेत्र में चीन ने अपने इलेक्ट्रानिक डिवाइस, कैमरे आदि से मॉनिटरिंग की व्यवस्था कर रखी थी। संसाधनों से गदगद चीनी फौज अपने कंट्रोल रूम से क्षेत्र की निगरानी कर रही थी। समझा जा रहा है कि चीन को उम्मीद ही नहीं थी कि भारतीय फौज इस तरह का फुर्तीला, बहादुरी से भरा सैन्य आपरेशन कर सकती है। भारतीय फौज को कमतर आंक कर चीन की फौज यहां गच्चा खा गई और भारतीय सेना ने सफलता का झंडा गाड़ दिया।