भारतीय वायुसेना का एएन-32 विमान उड़ान भरने के 35 मिनट बाद ही लापता हो गया। विमान में 13 लोग सवार थे। जिनमें सात अधिकारी शामिल हैं। इस विमान से आखिरी बार ग्राउंड स्टाफ ने सोमवार को दोपहर करीब एक बजे संपर्क हुआ था। इसके बाद से विमान से किसी तरह का संपर्क नहीं हो पाया है। विमान का पता लगाने के लिए वायुसेना ने सी-130जे, सी 130 हरक्यूलिस, सुखोई एसयू-30 लड़ाकू विमान को लगाया है। इसके अलावा मैदान में तैनात भारतीय सेना के जवान भी इसकी खोज में जुटे हुए हैं।
वायुसेना अधिकारियों के मुताबिक, मेनचुका एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड चीन सीमा से 35 किलोमीटर दूर है। 2009 में मेनचुका से 30 किमी दूर पश्चिमी सियांग जिले में हेयो गांव के पास रिंची हिल्स इलाके में एएन-32 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में 19 सुरक्षा कर्मियों की मौत हो गई थी।
वायुसेना का एएन-32 विमान तीन साल पहले 22 जुलाई, 2016 को हादसे का शिकार हो गया था। तब यह विमान चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर जा रहा था और इसमें 29 लोग सवार थे। उड़ान भरने के एक घंटे बाद बंगाल की खाड़ी से यह विमान लापता हो गया था। विमान को ढूंढने में वायुसेना ने एक माह लंबा खोजी अभियान चलाया था, लेकिन विमान का कोई पता नहीं चल सका था।
एएन-32 रूस में बना ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है और वायुसेना बड़ी संख्या में इसका इस्तेमाल करती है। इसे 1980 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। समय-समय पर इसे अपग्रेड किया जाता रहा है, लेकिन जो विमान लापता हुआ है वह अपग्रेड वर्जन नहीं था। वायुसेना इन विमानों का ज्यादातर इस्तेमाल कम और मध्यम हवाई दूरी के लिए सैन्य साजो सामान पहुंचाने, आपदा के समय और जवानों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए करती है।