भारतीय वायु सेना चीन और पाकिस्तान दोनों की सीमाओं के साथ उत्तरी क्षेत्र में प्रमुख प्रशिक्षण अभ्यास करेगी। इस अभ्यास का नाम त्रिशूल दिया गया है। भारतीय वायु सेना के अधिकारी ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इस मेगा अभ्यास में राफेल, मिराज 2000 और सुखोई-30 भाग लेंगे।
सात ही लड़ाकू विमानों के सभी प्रमुख बेड़े चिनूक और अपाचे सहित भारी-लिफ्ट परिवहन विमान और हेलिकॉप्टरों के साथ अभ्यास में भाग लेंगे। एएनआई ने बताया कि गरुड़ विशेष बल भी अभ्यास का हिस्सा हैं जहां वायु शक्ति के सभी तत्वों का अभ्यास किए जाने की संभावना है। लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पंजाब सहित उत्तरी क्षेत्र में चार से 14 सितंबर तक अभ्यास होगा।
अक्तूबर-नवंबर में होगा तरंग शक्ति
इससे पहले भारतीय वायुसेना ने अक्तूबर-नवंबर में तरंग शक्ति नामक एक बहुपक्षीय अभ्यास करने की घोषणा की थी। इसमें लड़ाकू जेट, सैन्य परिवहन विमान, मध्य हवा में ईंधन भरने वाले और हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली विमानों की भी भागीदारी देखी जाएगी। इस आयोजन में कुल छह देशों की वायु सेनाएं भाग लेंगी, जबकि कई अन्य पर्यवेक्षक के रूप में भाग लेंगे। इस अभ्यास में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया की वायु सेनाओं के भाग लेने की संभावना है।