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वायुसेना का ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान का अधूरा ख्वाब इस बार हुआ पूरा

Tue, 26 Feb 2019 02:15 PM IST
Harendra Chaudhary न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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कारगिल विजय दिवस
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मंगलवार तड़के पाक अधिकृत कश्मीर से सटे खैबर पख्तूनख्वा इलाके के मानशेरा जिले में स्थित बालाकोट का आसमान मिराज 2000 लड़ाकू विमानों की गूंज से थरथरा उठा। पुलवामा आतंकी हमले का जवाब देते हुए मिराज 2000 लड़ाकू विमानों ने बालाकोट स्थित जैश के ठिकानों पर 1000 किग्रा से ज्यादा बम बरसाए। ऐसा पहली बार हुआ जब वायु सेना ने अपनी सीमा लांघ कर पाक अधिकृत कश्मीर में एंट्री की। यहां तक कि करगिल युद्ध के दौरान भी भारतीय लड़ाकू विमानों ने सीमा क्षेत्र का उल्लंघन नहीं किया था।  

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1971 के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब भारतीय वायुसेना को भारतीय सीमा एलओसी लांघने को मजबूर होना पड़ा। यहां तक कि करगिल युद्ध के दौरान 1999 में भारत सरकार ने वायुसेना के लड़ाकू विमानों को एलओसी को नहीं लांघने का आदेश देते हुए अपनी सीमा में रह कर हमलों को अंजाम देने को कहा। इसकी वजह है कि जब भी वायुसेना किसी विदेशी देश के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने का फैसला लेती है, तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय में ऐसा करना युद्ध का संकेत समझा जाता है।

करगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायु सेना ने घुसपैठियों का सफाया करने के लिए ऑपरेशन सफेद सागर चलाया था। उस दौरान भारत के पास मिग 21, मिग 23 और मिग 27 जैसे लड़ाकू विमान थे, लेकिन ये विमान पाकिस्तान का मुकाबला करने के लिए नाकाफी थे। जिसके बाद वायुसेना ने आपरेशन सफेद सागर में मिराज 2000 विमानों का इस्तेमाल किया और दुश्मन को कमरतोड़ जवाब देते हुए जमकर बमबारी की। मिराज 2000 की खासियत है कि इनमें लेजर गाइडेड बमों से हमला करने की क्षमता है।  
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वहीं करगिल युद्ध में केवल दो मिराज 2000 लड़ाकू विमानों ने 514 ठिकानों पर बमबारी करते हुए पाकिस्तान नार्दर्न लाइट इंफेंटरी के बनाए बंकरों और कंमाड को जमकर नकसान पहुंचाया था। मिराज 2000 में लगे लेजर गाइडेड बमों ने पाकिस्तानी सेना को नुकसान पहुंचाते हुए टाइगर हिल को बचाया था। जिसके बाद भारत सरकार ने अतिरिक्त मिराज 2000 विमान खरीदने का फैसला लिया था।

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