भारतीय वायु सेना उत्तर-पूर्व में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी ड्रोन को लेकर अलर्ट मोड में है। यहां सेना चीनी ड्रोन की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रही है। रक्षा सूत्रों ने बताया कि इतना ही नहीं, सीमा पर हवाई क्षेत्र में किसी भी उल्लंघन को रोकने के लिए वायु सेना के लड़ाकू विमान सतर्क हैं। गौरतलब है कि कई बार वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी ड्रोन ने भारतीय क्षेत्र की ओर उड़ान भरने की कोशिश की है।
एलएसी पर वायु सेना की तैयारियों और मुस्तैदी के बारे में बताते हुए रक्षा सूत्रों ने कहा कि उत्तर-पूर्व क्षेत्र में अपने मजबूत रडार नेटवर्क के साथ भारतीय वायु सेना सारी गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखती है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर तो स्थिति शांतिपूर्ण होती है, लेकिन हाल के दिनों में ऐसे मौके आए हैं जब चीनी ड्रोन अपने क्षेत्र से एलएसी की ओर उड़े हैं। ऐसे में हम किसी भी कार्रवाई से निपटने में सक्षम हैं। ड्रोन या किसी भी विमान को हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
सूत्रों ने कहा कि यदि ड्रोन एलएसी के समानांतर उड़ान भर रहे हैं, तो दोनों पक्षों के बीच हुए समझौतों के अनुसार भारत को इससे कोई समस्या नहीं है, लेकिन अगर विमान या ड्रोन भारतीय क्षेत्र की ओर उड़ने वाले रडार द्वारा उठाए जाते हैं तो हम आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
सीएससी देश अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने व समुद्र की सुरक्षा को साथ आएं : रक्षा सचिव
वहीं, भारतीय रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने ने बृहस्पतिवार को कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन (सीएससी) के सदस्य देशों को अंतरराष्ट्रीय अपराधों का मुकाबला करने और समुद्र को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस उपाय करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
रक्षा सचिव ने समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, साइबर सुरक्षा, अहम तटीय बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और आपदा राहत से संबंधित आम मुद्दों का हल किए जाने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। उन्होंने सीएससी के तत्वावधान में भारतीय तटरक्षक बल की ओर से आयोजित पहले तटीय सुरक्षा सम्मेलन (सीओएससी) का उद्घाटन करते हुए यह टिप्पणी की। इस दो दिवसीय सम्मेलन का विषय 'तटीय सुरक्षा के लिए सहयोगात्मक प्रयास' है और इसमें चार सदस्य देशों-भारत, मालदीव, श्रीलंका और मॉरीशस ने भाग लिया। सीएससी के पर्यवेक्षक देशों- बांग्लादेश और सेशेल्स के प्रतिनिधियों ने भी इस सम्मेलन में भाग लिया।