भारतीय वायुसेना के अंबाला स्थित गोल्डन एरो स्क्वाड्रन ने जुलाई, 2020 और जनवरी, 2021 के बीच 11 राफेल लड़ाकू विमानों को पहले ही वायुसेना में शामिल कर लिया गया है। इन्हें लद्दाख सीमा पर तैना किया गया है। बता दें कि मई 2020 की शुरुआत से ही चीन के साथ सीमा गतिरोध के बाद सेना हाई अलर्ट पर है।
इसके साथ ही केंद्र सरकार फ्रांस की साफरान मिलिट्री एयरक्राफ्ट इंजिनों के संयुक्त विकास में भी रुचि दिखा रही है। उल्लेखनीय है कि राफेल लड़ाकू विमानों में 74 किलो न्यूटन के थ्रस्ट वाले दो एम88-3 साफ्रान इंजिन दिए गए हैं। लेकिन, राष्ट्रीय सुरक्षा योजनाकर्ता चाहते हैं कि डीआरडीओ के अत्याधुनिक मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के लिए अधिक थ्रस्ट वाले (90 से 100 किलो न्यूटन) इंजिन चाहते हैं।
महामारी के बावजूद तय समय पर मिलेंगे राफेल
भारत में फ्रांसीसी दूत इमैनुअल लेनिन ने कहा है कि कोरोना के बावजूद 2022 तक तय समय में सारे लड़ाकू विमान भारत को सौंप दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि कोरोना के बावजूद हम भारत को तय समय और उससे पहले राफेल सौंपने के लिए सक्षम हैं।