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सुरक्षा चिंताओं के चलते माली की लिथियम परियोजना से पीछे हटा भारत, आतंकी संगठन अल कायदा से क्या है कनेक्शन?

Thu, 12 Feb 2026 11:41 PM IST
देवेश त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

माली में अस्थिर राजनीतिक हालात और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के चलते भारत ने वहां प्रस्तावित लिथियम अन्वेषण पहल को फिलहाल आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस परियोजना में रूस की रोसाटॉम की भूमिका प्रस्तावित थी, जबकि भारत की काबिल और एनएलसी इंडिया भी इससे जुड़ी थीं।
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लिथियम की खदान (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : ANI
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विस्तार
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राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ते सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए भारत ने माली में प्रस्तावित लिथियम परियोजना से खुद को अलग करने का फैसला किया है। यह परियोजना रूस की सरकारी परमाणु कंपनी रोसाटॉम के समर्थन से आगे बढ़ाई जानी थी। सूत्रों के अनुसार, भारत अपने निवेश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठा रहा है। 
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जानकारी के अनुसार, पश्चिम अफ्रीकी देश माली में अल कायदा से जुड़े उग्रवादी समूह सक्रिय हैं और वे आर्थिक परिसंपत्तियों तथा विदेशी निवेश को निशाना बना रहे हैं। ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों ने अपने नागरिकों को माली छोड़ने की सलाह भी दी है।

बढ़ा निवेश गंवाने का जोखिम
पिछले वर्ष रोसाटॉम ने भारत की सरकारी कंपनी खनिज विदेश इंडिया लिमिटेड (काबिल) और एनएलसी इंडिया लिमिटेड से माली में लिथियम की खोज के लिए संपर्क किया था। एक सूत्र ने कहा, परियोजना फिलहाल रोक दी गई है, क्योंकि ऐसे हालात में निवेश करने पर धन गंवाने का जोखिम है। 
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फिलहाल, भारत के खनन मंत्रालय, काबिल और एनएलसी इंडिया ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। रोसाटॉम ने भी इस मामले में अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। रूस हाल के वर्षों में माली और बुर्किना फासो सहित कई अफ्रीकी देशों के साथ सैन्य सहयोग के जरिये संबंध मजबूत कर रहा है।

लिथियम की स्थिर आपूर्ति के लिए प्रयासरत भारत
भारत कार्बन उत्सर्जन के मामले में तीसरे स्थान पर है, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी लिथियम की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहता है। सरकार ने 2030 तक निजी कारों में 30 प्रतिशत और दोपहिया वाहनों में 80 प्रतिशत इलेक्ट्रिक हिस्सेदारी का लक्ष्य रखा है, जो फिलहाल क्रमश: 4 और 6 प्रतिशत है। भारत ने अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और चिली जैसे संसाधन-समृद्ध देशों में महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच के लिए प्रयास तेज किए हैं। वर्ष 2024 में काबिल ने अर्जेंटीना की एक सरकारी कंपनी के साथ पांच लिथियम ब्लॉकों की खोज और खनन के लिए समझौता किया था, लेकिन उसके बाद ऐसा कोई नया करार नहीं हुआ है।
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