संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक बार फिर आतंक का साथ देने वाले चीन के साथ भारत धैर्य की नीति अपनाएगा। लेकिन साथ ही भारत आतंक के खिलाफ अपनी स्थिति के साथ बिलकुल भी समझौता नहीं करेगा। ये बात सरकार के सूत्रों ने शनिवार को कही है। ये बात ऐसे समय में कही गई है जब संयुक्त राष्ट्र में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित होने से बचाने के लिए चीन ने वीटो का इस्तेमाल किया है।
सूत्रों के मुताबिक चीन को पाकिस्तान के साथ कई मुद्दे सुलझाने हैं क्योंकि वो जानता है कि पाकिस्तान की धरती पर कई आतंकी संगठन काम कर रहे हैं और जो चीनी हितों के भी खिलाफ है।
चीन पाकिस्तान के साथ मुद्दे सुलझाएगा और भारत धैर्य रखेगा। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में चीन सहित सभी सदस्य देशों को मसूद अजहर के खिलाफ सबूत दिखाए थे। शनिवार को संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रवक्ता सईद अकबरुद्दीन ने ट्वीट कर कहा, "धैर्य- कूटनीति का एक अनिवार्य घटक।"
सूत्रों के मुताबिक भारत चीन को पाकिस्तान के साथ मुद्दे सुलझाने के लिए समय देगा। भारत और चीन के बीच उच्च स्तर पर कई हफ्तों से बातचीत चल रही है। वहीं पाकिस्तान ने भी आतंक के खिलाफ अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है। जिन संगठनों पर उसने प्रतिबंध लगाया है उनपर भी प्रतिबंध नहीं लगा है। वह महज एक दिखावा मात्र है।
बुधवार को चीन ने चौथी बार भारत की कोशिश को नाकाम करते हुए आतंकी मसूद अजहर को बचाया है। चीन के इस कदम को भारत ने निराशाजनक बताया। भारत के पास अजहर के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं और उसे उम्मीद भी थी कि अजहर वैश्विक आतंकी घोषित हो जाएगा। लेकिन चीन अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान का साथ देने के लिए आतंक का साथ देने से भी नहीं कतराया। सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा परिषद में 14 में से 15 सदस्य भारत के साथ हैं। भारत तब तक आराम से नहीं बैठेगा जब तक अजहर पर प्रतिबंध ना लग जाए।
बता दें 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) पर हुए आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी भी जैश-ए-मोहम्मद ने ली है। इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे।