डोभाल के हाथ कमान
अफगानिस्तान में दोबारा तालिबान शासन बहाल होने के बाद से ही भावी रिश्ते की पटकथा लिखने का जिम्मा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल पर है। डोभाल इस मोर्चे पर रूस सहित अफगानिस्तान के सभी अहम पड़ोसी देशों मसलन ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान के ही नहीं, बल्कि अमेरिका के भी लगातार संपर्क में हैं। डोभाल की रणनीति के अनुरूप ही तालिबान सरकार के साथ भी लगातार बैकडोर चैनल से बातचीत हो रही है।
चीन फैला रहा पांव
वर्तमान में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्ते सबसे निचले स्तर पर हैं, जबकि चीन अफगानिस्तान के साथ कई करार करने के साथ ही चीन-पाक आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को काबुल से गुजारने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत की रणनीति अफगानिस्तान से धीरे-धीरे द्विपक्षीय संबंध बहाल कर चीन का दखल कम करने की है।
रूस में पाकिस्तान ने गंवाया मौका
आठ फरवरी को रूस में हुई एससीओ सदस्य देशों के एनएसए की बैठक में पाकिस्तान ने अनुपस्थित रह कर बड़ा मौका गंवाया। अफगानिस्तान पर हुई इस चर्चा में भारत ने वहां स्थाई शांति बहाली पर जोर दिया। इस बैठक के इतर भी डोभाल ने ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान के एनएसए के साथ अलग से अफगानिस्तान के मामले पर चर्चा की।