भारत को अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दी जा रही सैन्य सहायता मंजूर नहीं है। भारत ने इसको लेकर गंभीर चिंता जाहिर करते हुए इस फैसले पर अपनी चिंता से अमेरिका को अवगत करा दिया है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार भारत ने नई दिल्ली में अमेरिका के राजदूत के सामने इस मुद्दे को उठाया है।
गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि दिल्ली में इस मामले को अमेरिकी राजदूत के सामने उठाया गया है। इसके साथ ही भारतीय राजदूत हर्षवर्धन श्रींगला ने वाशिंगटन में भी इसे अमेरिकी सरकार के सामने उठाया। हमने पाकिस्तान को अमेरिकी सैन्य सहायता को लेकर बड़ी चिंता जाहिर की है।
बता दें कि अमेरिका ने पाकिस्तान को 12.5 करोड़ डॉलर की तकनीकी सैन्य सहायता देने को मंजूरी दे दी है। भारत का मानना है कि इस तरह की सैन्य सहायता देने के निर्णय पर अमेरिका को पुन: विचार करना चाहिए। भारत इसके लिए हर संभव दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
अमेरिका में इमरान खान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बैठक के कुछ दिनों बाद ही पेंटागन ने 26 जुलाई को कहा था कि विदेश विभाग ने पाकिस्तान को दिए गए एफ-16 की 24 घंटे मॉनिटरिंग के लिए 12.5 करोड़ डॉलर के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने अमेरिका के समकक्ष के सामने भी इस मुद्दे को उठा सकते हैं। गौरतलब है कि अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रपं मे पाकिस्तान को सितंबर 2018 में दी जानी करीब 80.0 करोड़ डालर की सैन्य सहायता रोक दी थी।
ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान पर आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने का दबाव बनाते हुए यह सहायता रोकी थी। अमेरिका ने पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और घुसपैठ रोकने के लिए 2002 से तेजी से सैन्य सहायता देना आरंभ किया था। एक अनुमान के अनुसार इस क्रम में अमेरिका ने पिछले साल तक पाकिस्तान को 30 अरब डालर से अधिक की सैन्य सहायता दे चुका था।
(पीटीआई इनपुट)