मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत के तहत 2019 तक भारत को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) होने का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण देश के विभिन्न राज्यों में तैयार 53.24 लाख शौचालयों का प्रयोग में नहीं होना है। पानी की कमी और पर्याप्त जल निकासी व्यवस्था न होने के कारण इनका संचालन कठिन हो रहा है। केंद्रीय जल और स्वच्छता मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने ग्रामीण इलाकों में एसबीएम को लागू करने के लिए स्थानीय निकाय से मदद मांगी है।
ताकि आंकड़ों के मुताबिक 53,24,794 शौचालयों को उपयोग योग्य बनाया जा सके। 2 अक्तूबर 2014 से शुरू हुए स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांवों में पांच साल में दस करोड़ शौचालय बनने थे। देश के ग्रामीण अंचलों में जुलाई 2018 तक करीब 8 करोड़ से ज्यादा घरेलू शौचालय बनाए जा चुके थे। इनमें बड़े पैमाने पर ऐसे शौचालय भी हैं जिनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
ऐसे में गांवों में ओडीएफ का लक्ष्य हासिल करना मंत्रालय के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। नीति आयोग के एक पैनल ने भी हाल ही में कहा था कि 2 अक्टूबर 2019 तक ओडीएफ के लक्ष्य को हासिल करना राज्यों के लिए बड़ी चुनौती है।
राज्य नहीं दिखा रहे उत्साह
खुले में शौच मुक्त अभियान को लेकर राज्यों का रवैया उत्साहजनक नहीं है। तैयार शौचालयों को इस्तेमाल करने योग्य बनाने में खराब प्रदर्शन करने में उत्तर प्रदेश (26 प्रतिशत), झारखंड (49 प्रतिशत), बिहार (18 प्रतिशत) और अरुणाचल प्रदेश (22 प्रतिशत) शामिल हैं। वहीं पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सक्रियता से पुनर्निर्माण के कार्य में लगे हैं।