नोरोव ने बताया कि एससीओ के सभी सदस्यों ने भारत की मेजबानी का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि इस पूरे क्षेत्र में भारत एक बहुत ही महत्वपूर्ण देश है और यहां आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ने की पूरी संभावना है। उन्होंने बताया कि इस दौरान होने वाली कई बैठकों में आर्थिक मामलों को लेकर होने वाली बैठक खासी अहम होगी।
भारत एससीओ में साल 2005 से ही पर्यवेक्षक की भूमिका में रहा है, जबकि भारत और पाकिस्तान को साल 2017 में इसके पूर्णकालिक सदस्य का दर्जा दिया गया था। शंघाई सहयोग संगठन की शुरुआत साल 2001 में रूस, चीन, किरगिक रिपब्लिक, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान के शंघाई में हुए एक सम्मेलन में हुई थी।
जाहिर है मौजूदा स्थिति में भारत के लिए इस बैठक में पाकिस्तान को निमंत्रण भेजने में कोई मुश्किल नहीं है। बैठक इस साल के अंत में होनी है और तब तक दोनों देशों के बीच क्या उतार-चढ़ाव आते हैं, कहना मुश्किल है। ऐसा भी होता रहा है कि कई देश अपने विदेश मंत्री को या किसी अन्य प्रतिनिधि को भेजकर बैठक में शामिल होने की औपचारिकता पूरी करते रहे हैं।