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शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में पाकिस्तान को न्योता भेजेगा भारत

Wed, 15 Jan 2020 11:21 PM IST
गौरव पाण्डेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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इस साल भारत में होने जा रहे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक के लिए पाकिस्तान को निमंत्रण भेजा जाएगा। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक एससीओ के प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए भारत की तरफ से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को बैठक में शामिल होने का औपचारिक बुलावा भेजा जाएगा। अब ये पाकिस्तान को तय करना है कि वह इसमें हिस्सा लेगा या नहीं।

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भारत पहली बार एससीओ की बैठक की मेजबानी कर रहा है। इसकी जानकारी एससीओ के महासचिव व्लादिमिर नोरोव ने 13 जनवरी को दी। नोरोव 12 जनवरी से चार दिनों के भारत दौरे पर हैं। उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से इस बारे में लंबी बातचीत की। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि जयशंकर से उनकी मुलाकात के दौरान पाकिस्तान को लेकर कोई बातचीत हुई या नहीं।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी ट्वीट करके इस बारे में जानकारी दी है और कहा है कि शंघाई सहयोग संगठन के महासचिव व्लादिमिर नोरोव का उन्होंने स्वागत किया और भारत में एससीओ की बैठक की तैयारियों को लेकर चर्चा की। जयशंकर ने बताया कि भारत इस साल एससीओ की बैठक की जिम्मेदारी बेहतर तरीके से उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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एससीओ में 2005 से पर्यवेक्षक की भूमिका में रहा है भारत

नोरोव ने बताया कि एससीओ के सभी सदस्यों ने भारत की मेजबानी का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि इस पूरे क्षेत्र में भारत एक बहुत ही महत्वपूर्ण देश है और यहां आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ने की पूरी संभावना है। उन्होंने बताया कि इस दौरान होने वाली कई बैठकों में आर्थिक मामलों को लेकर होने वाली बैठक खासी अहम होगी। 

भारत एससीओ में साल 2005 से ही पर्यवेक्षक की भूमिका में रहा है, जबकि भारत और पाकिस्तान को साल 2017 में इसके पूर्णकालिक सदस्य का दर्जा दिया गया था। शंघाई सहयोग संगठन की शुरुआत साल 2001 में रूस, चीन, किरगिक रिपब्लिक, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान के शंघाई में हुए एक सम्मेलन में हुई थी।

जाहिर है मौजूदा स्थिति में भारत के लिए इस बैठक में पाकिस्तान को निमंत्रण भेजने में कोई मुश्किल नहीं है। बैठक इस साल के अंत में होनी है और तब तक दोनों देशों के बीच क्या उतार-चढ़ाव आते हैं, कहना मुश्किल है। ऐसा भी होता रहा है कि कई देश अपने विदेश मंत्री को या किसी अन्य प्रतिनिधि को भेजकर बैठक में शामिल होने की औपचारिकता पूरी करते रहे हैं।
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