अमेरिका और इंग्लैंड की तर्ज पर केंद्र सरकार देश के ट्रैफिक सिस्टम को सुधारने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, इंटैलिजेंट ट्रांसपोटेशन सिस्टम, ट्रैकिंग डिवाइस समेत अन्य उत्पाद तथा समाधान विकसित कर रहा है। इसमें पैदल चलने वालों के लिए सिग्नल कंट्रोलर, आपात सेवा वाहन प्राथमिकता तंत्र, यातायात निगरानी, प्रबंधन सॉफ्टवेयर और वाहनों की संख्या के मुताबिक खुद ही लाइटों का अनुकूल समेत अन्य व्यवस्थाएं शामिल हैं।
आईटी सचिव अजय साहनी के मुताबिक मंत्रालय, इंटैलिजेंट ट्रांस्पोर्ट सिस्टम (आईटीएस), उत्पादों और समाधान विकसित कर रहा है। इसमें कई पहलू हैं जिनके जरिए वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन, जाम और सड़क दुर्घटना में कमी लायी जा सकेगी। प्रदूषण से बचाव और लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर यह अहम होगा। याद रहे कि मौजूदा समय अमेरिका और इंग्लैंड समेत कई विकसित देशों में यातायात के लिए इस तंत्र का उपयोग किया जा रहा है। इसकी शुरुआत बड़े शहरों में पायलट प्रोजेक्ट से की जाएगी, जिसमें सफलता मिलने के बाद इसे देश भर में लागू किया जाएगा।
आईटीएस के जरिए सार्वजनिक वाहनों की निगरानी भी की जा सकेगी। जबकि सबसे खास बात ये होगी कि ट्रैफिक पुलिस को लगातार चौराहों पर खड़े होकर वाहनों की आवाजाही केक्ुताबिक लाइटों का समय नहीं बढ़ाना होगा। इसी तरह रेड लाइट का उल्लंघन करने वाले को ट्रैक कर तत्काल पकड़ा जा सकेगा। इस तंत्र में उल्लंघनकर्ता के नंबर, गाड़ी के मॉडल समेत अन्य जानकारी अगले रास्ते पर खड़े ट्रैफिक पुलिस को स्वत: मिलेगी। वाहन चालक द्वारा यात्रा के दौरान मोबाइल पर बात करने या अन्य किसी तरहध किए गए उल्लंघन की जानकारी भी इससे मिलेगी।
आईटी मंत्रालय के मुताबिक मौजूदा समय वाहनों के लिए ग्रीन लाइट पर रास्ता पार करने वाले पथिकों के लिए कोई मजबूत व्यवस्था नहीं है। आईटीएस आने पर उन्हें भी नियंत्रित किया जाएगा। जबकि पार्किंग के लिए भी इंटैलिजेंट प्रबंधन तंत्र में गाड़ियों की सुरक्षा की निगरानी और सही तरीके से खड़ा करने की व्यवस्था लागू होगी।
इसके अलावा आपात सेवाओं वाले वाहनों के लिए प्राथमिकता सिस्टम होगा यानी कि एंबूलेंस की आवाजाही पर स्वत: लाइट ग्रीन हो जाएगी। जबकि दूसरे छोर के लिए रेड हो जाएगी। गौरतलब है कि आईटीएस लागू होने पर सार्वजनिक वाहनों की जीपीएस सिस्टम नहीं चलने पर ट्रैफिक पुलिस को अलर्ट खुद-ब-खुद जाएगा। मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक सरकार की प्राथमिकता इस व्यवस्था को लागू कर प्रदूषण से बचाव का है। साथ ही यातायात व्यवस्था को दुरुस्त बनाने का है।