जी-20 स्वास्थ्य समूह ने तीन प्राथमिकता स्वास्थ्य आपातकालीन तैयारी, डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार और फार्मास्यूटिकल्स में मजबूत सहयोग तय की हैं लेकिन इसके अलावा भी भारत ने कई प्रस्ताव रखे हैं जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय चिकित्सा, स्वास्थ्य सेवाएं और विज्ञान के जरिए सभी देशों का सहयोग करना है।
भारत स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक दायरा बढ़ाने के लिए जी-20 देशों की मदद करेगा। भारत की अध्यक्षता में जी-20 के तहत चार बार स्वास्थ्य कार्यसमूह की बैठक हुई हैं। उनमें लिए गए नीतिगत फैसलों को शिखर सम्मेलन के दिल्ली घोषणा में भी शामिल किया है।
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मंत्रालय के एक निदेशक ने बताया, जी-20 में हमने इस बात पर विचार किया है कि कैसे नए अवतार में आकर अधिक मजबूत और जवाबदेही के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवा पर व्यापक दायरा हो सकता है? अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि जी-20 के तहत स्वास्थ्य कार्यसमूह की बैठक होने का सिलसिला 2017 से शुरू हुआ है। 2020 में कोरोना महामारी के चलते यह प्रभावित हुआ लेकिन पहली बार भारत ने स्वास्थ्य के अलग-अलग मुद्दों को लेकर चार बैठकें आयोजित कीं। इसका देश में चिकित्सा पर्यटन को भी लाभ हुआ है। जी-20 देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत के अस्पताल उनके यहां स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सकते हैं। भविष्य में भारत के डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ इन देशों में अपनी सेवाएं देंगे। आयुष्मान भारत योजना से लेकर कोविन, आभा, ई-संजीवनी ने जी 20-देशों को काफी आकर्षित किया है। पारंपरिक चिकित्सा को लेकर हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर इन देशों ने समझौता भी किया है।
तीन प्राथमिकताओं के अलावा भी प्रस्ताव
जी-20 स्वास्थ्य समूह ने तीन प्राथमिकता स्वास्थ्य आपातकालीन तैयारी, डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार और फार्मास्यूटिकल्स में मजबूत सहयोग तय की हैं लेकिन इसके अलावा भी भारत ने कई प्रस्ताव रखे हैं जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय चिकित्सा, स्वास्थ्य सेवाएं और विज्ञान के जरिए सभी देशों का सहयोग करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सभी प्रस्तावों का समर्थन किया है।