भारत का पहले वैश्विक कार्बन टैक्स के पक्ष में मतदान
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भारत ने शिपिंग (पोत परिवहन) पर दुनिया के पहले वैश्विक कार्बन टैक्स के पक्ष में किया मतदान। भारत के अलावा चीन समेत 62 अन्य देशों ने भी संयुक्त राष्ट्र की पोत परिवहन एजेंसी के उद्योग पर वैश्विक कार्बन टैक्स लगाने के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है। इस समझौते को अंतरराष्ट्रीय जलवायु नीति के लिए एक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
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जहाजों से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना मकसद
एक हफ्ते चली लंबी बातचीत के बाद शुक्रवार को लंदन में अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के मुख्यालय में इस बारे में फैसला किया गया। इस कदम का उद्देश्य पानी के जहाजों से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना है। यह पहली बार है जब किसी पूरे उद्योग पर वैश्विक कार्बन कर लगाया गया है। इसके तहत वर्ष 2028 से जहाजों को या तो कम उत्सर्जन वाले ईंधन को अपनाना होगा या उनके द्वारा किए गए प्रदूषण के लिए शुल्क का भुगतान करना होगा। कार्बन टैक्स से साल 2030 तक 40 अरब डॉलर की राशि जुटाई जा सकती है। कार्बन टैक्स से जुटाए गए राजस्व का इस्तेमाल समुद्री क्षेत्र को कार्बन मुक्त करने के लिए किया जाएगा।
उत्सर्जन में 10 प्रतिशत की कमी की उम्मीद
विकासशील देशों की जलवायु वित्त संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहने के कारण इसकी आलोचना भी हो रही है। कार्बन मूल्य निर्धारण से साल 2030 तक शिपिंग उत्सर्जन में केवल 10 प्रतिशत की कमी आने की उम्मीद है, जो कि आईएमओ के अपने लक्ष्य 20 प्रतिशत से बहुत कम है।
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अमेरिका ने मतदान से बनाई दूरी
भारत के अलावा जिन 62 देशों ने वैश्विक कार्बन टैक्स के पक्ष में मतदान किया, उनमें चीन और ब्राजील भी शामिल हैं। हालांकि, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), रूस और वेनेजुएला जैसे तेल संपन्न देशों ने कार्बन टैक्स के विरोध में मतदान किया। जबकि, अमेरिका ने वार्ता में भाग नहीं लिया और मतदान के दौरान अनुपस्थित रहा।