केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि अमेरिका की नई वैश्विक शुल्क व्यवस्था लागू होने के बाद ही भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह ऐसा समझौता है, जिसमें एक देश को प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले तुलनात्मक लाभ प्राप्त है।
राजेश अग्रवाल ने कहा, 'यह समझौता मार्च में होना था। (लेकिन) जब हमने यह कहा था, तब तक अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) के तहत टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आया था। अब, आईईईपीए टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, टैरिफ का कोई अस्तित्व नहीं है। अब अनुच्छेद 122 के तहत टैरिफ लागू है, जो भुगतान संतुलन संकट से संबंधित हैं और पांच महीने के लिए हैं।'
पहले अमेरिकी तय करेगा टैरिफ, फिर होगा समझौता
उन्होंने आगे कहा, 'यह टैरिफ लगभग 10 फीसदी है। इसलिए, जिस समझौते को हम अंतिम रूप देंगे और जिस पर हस्ताक्षर करेंगे, वह टैरिफ संरचना या अमेरिका के बाजार में भारत को मिलने वाले तुलनात्मक लाभ के अनुरूप होना चाहिए।' अग्रवाल ने कहा कि अमेरिका वैश्विक टैरिफ संरचना को फिर से बनाने पर काम कर रहा है। एक बार उसे अंतिम रूप दे दिया जाए और स्थिति स्पष्ट हो उसके बाद ही समक्षौते पर हस्ताक्षर होंगे। भारत पर लागू 18 प्रतिशत टैरिफ में किसी भी बदलाव की स्थिति में, यह सब इस बात पर निर्भर करेगा कि यह कैसे होता है और वैश्विक संरचना कैसे बनती है।
दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए सभी टैरिफ को रद्द कर दिया था। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप इस फैसले की लगातार आलोचना करते रहे हैं और इसके तुरंत बाद 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान भी किया। इसके साथ ही अमेरिका भारत सहित 16 देशों के खिलाफ जांच भी कर रहा है, ताकि उनके व्यापारिक नियमों के आधार पर अलग-अलग देशों पर टैरिफ दर तय की जा सके।
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भारत सरकार का कहना है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर फैसला तब लिया जाएगा, जब अमेरिका नया टैरिफ ढांचा तय कर लेगा। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कहा है कि उनके पास टैरिफ लगाने के अन्य विकल्प भी मौजूद हैं।राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अमेरिकी नागरिकों के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें टैरिफ लगाने का पूरा अधिकार है और इसी कारण अब किसी दूसरे तरीके से टैरिफ लागू करने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है।
ईरान और इस्राइल के बीच जारी तनाव के कारण पैदा हुए ईंधन संकट पर वाणिज्य सचिव ने कहा कि भारत ने रूस से तेल खरीद बढ़ा दी है। अमेरिका और इस्राइल की ओर से 28 फरवरी को ईरान पर किए गए सैन्य हमले के बाद तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। इसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर पाबंदी लगा दी। दरअसल दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस भी इसी मार्ग से अलग-अलग देशों तक पहुंचाई जाती है।
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