भारत-अमेरिका व्यापार समझौता को लेकर संसद से लेकर संसद परिसर तक सियासी घमासान तेज रहा। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि व्यापार समझौते के नाम पर देश के हितों से समझौता किया गया है। वहीं, केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने पलटवार करते हुए कहा कि यह समझौता भारत की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देगा और राहुल गांधी झूठ और फरेब के जरिए देश को गुमराह कर रहे हैं।
क्या सवाल उठाए राहुल गांधी ने?
राहुल गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत में कहा कि जो व्यापार समझौता कई महीनों से अटका हुआ था, उसे अचानक साइन कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्या बदला कि समझौता तुरंत कर दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार भारी दबाव में है और अपनी छवि बचाने के लिए जल्दबाजी में फैसला लिया गया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाया है। उनकी मेहनत को बेच दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें संसद में बोलने नहीं दिया गया क्योंकि सरकार सच्चाई से डर रही है।
संसद में बोलने से रोकने का आरोप क्यों?
राहुल गांधी ने कहा कि इतिहास में पहली बार नेता प्रतिपक्ष को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने का मौका नहीं दिया गया। उनके मुताबिक असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए दूसरे विषय सामने लाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व सेना प्रमुख का बयान साइड शो है और असली सवाल व्यापार समझौते की शर्तों का है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने सिर्फ किसानों ही नहीं बल्कि पूरे देश के हितों से समझौता किया है और इसी वजह से उनकी आवाज दबाई जा रही है।
पीयूष गोयल ने क्या जवाब दिया?
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह व्यापार समझौता भारत के लिए फायदेमंद है और विपक्ष जानबूझकर भ्रम फैला रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार संसद में इस पर विस्तार से बोलना चाहती थी, लेकिन विपक्ष ने हंगामा किया और कार्यवाही बाधित की। गोयल ने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसदों ने आसन तक पहुंचकर मर्यादा तोड़ी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल और अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मित्रता के कारण बेहतर समझौता संभव हुआ।
पीयूष गोयल के बयान पर पर क्या बोले पवन खेड़ा?
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के बयान पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि जब संसद का सत्र चल रहा हो तो मंत्री को बाहर आकर बयान नहीं देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि गोयल को संसद में बोलने से किसने रोका था। खेड़ा ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष को अपना बयान पूरा करने ही नहीं दिया गया, जो संसदीय इतिहास में अभूतपूर्व है। उन्होंने कहा कि सदन सुचारु रूप से चलाना सरकार की जिम्मेदारी है और इसके लिए नेता प्रतिपक्ष की बात सुनना जरूरी है। खेड़ा के अनुसार नेता प्रतिपक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा और जनरल नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक से जुड़े मुद्दे उठा रहे थे, जिन्हें जानबूझकर रोका गया।
समझौते पर क्या-क्या फायदे बताए गए?
- भारत पर लगा 50 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर कम किया गया।
- उद्योग, वस्त्र और निर्यात क्षेत्र को राहत मिलने की बात कही गई।
- कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा गया।
- एमएसएमई, इंजीनियरिंग, जेम-ज्वैलरी, लेदर और मरीन सेक्टर को अवसर मिलने का दावा।
- सरकार के अनुसार लंबी बातचीत और जटिल मुद्दों के बाद समझौता हुआ।
क्यों अहम माना जा रहा यह समझौता
सरकार का कहना है कि यह व्यापार समझौता निर्यात बढ़ाने, टैरिफ घटाने और भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में बेहतर मौका देने के लिए अहम है। गोयल ने कहा कि पहले भी आरसीईपी जैसे समझौते से भारत को दूर रखकर भाजपा सरकार ने देशहित बचाया था। इस बार भी कृषि और डेयरी हितों से समझौता नहीं किया गया। उनके अनुसार यह समझौता प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले भारत को बेहतर स्थिति देता है और अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
अन्य वीडियो-