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Supreme Court: सोनम वांगचुक को क्यों किया गिरफ्तार? केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में चीन-PAK का जिक्र कर कही ये बात

Tue, 03 Feb 2026 06:06 PM IST
देवेश त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई लेह में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद की गई थी, जिनमें चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हुए थे। सरकार ने उन हिंसक घटनाओं के लिए वांगचुक पर उकसाने का आरोप लगाया है।
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जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक - फोटो : ANI
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विस्तार
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केंद्र सरकार और लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को एक सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्र में लोगों को उकसाने के आरोप में हिरासत में लिया गया है। सरकार ने कहा कि यह इलाका पाकिस्तान और चीन से सटा हुआ है, जहां क्षेत्रीय संवेदनशीलता जुड़ी हुई है।
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सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत को उचित ठहराते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ के समक्ष कहा कि हिरासत आदेश जारी करते समय सभी प्रक्रियागत सुरक्षा प्रावधानों का पूरी तरह पालन किया गया है।

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पाकिस्तान-चीन से सटे इलाके में लोगों को भड़का रहे वांगचुक :केंद्र सरकार
सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, 'यह अदालत ऐसे व्यक्ति से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही है, जो पाकिस्तान और चीन से सटे एक सीमावर्ती क्षेत्र में लोगों को भड़काने का काम कर रहा है, जहां क्षेत्रीय संवेदनशीलता शामिल है।' उन्होंने यह भी कहा कि वांगचुक को निष्पक्ष व्यवहार दिया गया है और एनएसए के सभी प्रावधानों का सख्ती से पालन किया गया।

मामले में दलीलें पूरी नहीं हो सकीं और अब आगे की सुनवाई बुधवार को होगी। इससे पहले सोमवार को केंद्र ने अदालत को बताया था कि वांगचुक ने नेपाल और बांग्लादेश जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए जेन जी को आंदोलन के लिए उकसाने की कोशिश की थी। सरकार ने यह भी कहा कि वांगचुक ने अरब क्रांति जैसे आंदोलनों का जिक्र किया, जिनके वजह से अरब देशों में कई सरकारें गिर गई थीं।

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वांगचुक की पत्नी की याचिका पर हो रही सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो की ओर से दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें उनकी हिरासत को चुनौती दी गई है। याचिका में दावा किया गया है कि हिरासत अवैध और मनमानी है। इसके साथ ही यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि पुलिस ने 'उधार ली गई सामग्री' और चुनिंदा वीडियो के आधार पर प्राधिकारी को गुमराह किया है। याचिका में कहा गया है कि तीन दशकों से अधिक समय तक शिक्षा, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले वांगचुक को अचानक इस तरह निशाना बनाना पूरी तरह 'अविश्वसनीय' है।

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