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भारत-अमेरिका BECA समझौताः अब तो पलक झपकते ही हवा में धुआं-धुआं हो जाएगा दुश्मन का वार

Tue, 27 Oct 2020 05:48 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • मिसाइल, फाइटरजेट, सैन्य अड्डे सब होंगे निशाने पर
  • अचूक निशाना लगाने की संभावना भी बढ़ी
  • अमेरिका के साथ सामरिक रिश्ते को मिला नया आधार
  • माइक पोम्पियो द्वारा गलवां वैली में खूनी झड़प के जिक्र से चीन को मिर्ची लगना तय
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US Secretary of State Mike Pompeo and Defence Secretary Mark T Esper called on Prime Minister Narendra Modi on Tuesday - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत और अमेरिका के बीच में बुनियादी विनिमय सहयोग समझौता यानी बेसिक एक्सचेंज एंड कोआपरेशन एग्रीमेंट (BECA) को लेकर सहमति बनने के बाद भारतीय सशस्त्र बलों को सटीक आंख मिल गई है। अब अमेरिकी तकनीक और सटीक सूचनाओं के हस्तांतरण के सहारे भारत अपनी तरफ आने वाले न केवल दुश्मन के हर वार को समय रहते भांप लेगा, बल्कि उसके ठिकानों के बारे में भी सटीक जानकारी मिल सकेगी। वायुसेना ने अवकाश प्राप्त वाइस एयर मार्शल एनबी सिंह कहते हैं इससे भारतीय मिसाइलों, फाइटर जेटों को सटीक निशाना लगाकार दुश्मन के ठिकाने तबाह करने में मदद मिलेगी। नौसैनिक युद्ध पोतों से भी दुश्मन के ठिाकने को आसानी से ध्वस्त किया जा सकेगा। सेना मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि युद्धकाल या हर परिस्थिति में सूचना की उपयोगिता सबसे अधिक होती है। अमेरिका के साथ बेका समझौता इसे काफी मजबूती प्रदान करेगा। इससे सैन्य बलों के मनोबल में वृद्धि होगी।

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किसके साथ अमेरिका करता है यह समझौता?

अमेरिका के तीन प्रमुख समझौतों में से यह एक है। दो अन्य समझौतों में पहला सैन्य संसाधन से जुड़ा समझौता है और दूसरा विश्वसनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान से जुड़ा है। इस तरह से तीनों समझौते किसी भी देश को अमेरिका के सबसे करीबी देशों की श्रेणी में रखते हैं। इसके अंतर्गत दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच में संवेदनशील और गुप्त सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है। इसके अंतर्गत
भू-स्थानिक सूचनाओं की जानकारी साझा की जाती है। यह अमेरिका के विशेष कृत्रिम उपग्रहों के सहारे नॉटिकल और एरोनॉटिकल चार्ट से जुड़ी हुई सूचना होती है। इसका अर्थ यह भी हुआ कि यदि हमारा जहाज दुश्मन के किसी ठिकाने को तबाह करने के मिशन पर है और उसका पीछा दुश्मन का कोई फाइटर जेट कर रहा है, तो दुश्मन के फाइटर के लोकेशन की सटीक जानकारी भी मिल सकेगी और उसे आसानी से निशाना बनाया जा सकेगा या खुद का बचाव किया जा सकेगा। सूचनाएं प्रिंट, डिजिटल, मानचित्र, नॉटिकल, एरोनॉटिकल चार्ट्स और वाणिज्यिक हो सकती है। इसमें इमेजरी, भू गणितीय, जिओफिजिकल, जिओ मेट्रिक, ग्रैविटी डाटा आदि कुछ भी हो सकती हैं। इस तरह से इस तरह की सूचनाओं का सैन्य आपरेशन में काफी महत्व है।

सेना, नौसेना, वायुसेना की बढ़ेगी फायर पावर

अमेरिका के साथ हुए बेका समझौते के बाद सेना के तीनों अंगों की फायर पावर में काफी इजाफा होगा। इससे जहां सैन्य बलों को दुश्मन के ठिकानों, दुश्मन के सैन्य अड्डों, हमले के उद्देश्य से आ रही मिसाइलों, लो फ्लाइंग ऑब्जेक्ट, फाइटर के बारे में सटीक जानकारी मिलेगी, वहीं भारतीय फाइटर जेटों, प्रतिरक्षा प्रणाली, फाइटर जेट की कमांड एंड कंट्रोल प्रणाली को उन्हें ध्वस्त करने के लिए सटीक इनपुट भी प्रप्त होंगे। नौसेना के विध्वंसक, युद्धपोत, पनडुब्बी संवेदनशील, गोपनीय सूचनाओं के आधार पर दुश्मन के ठिकानों को समय रहते निशाना लगा कर तबाह कर सकेंगी।

अमेरिका ने लादेन और सुलेमानी पर की थी कार्रवाई

सूचना के महत्व को बताने के लिए दो घटनाएं पर्याप्त हैं। अमेरिका के नेवल सील कमांडोज ने अपाचे हेलीकॉप्टर की सहायता से पाकिस्तान के एब्टाबाद में इसी तरह की सटीक मैपिंग के सहारे एंट्री की थी। रातों-रात ऑपरेशन में ओसामा को मार गिराया था। अमेरिका के घातक यूएवी भी संवेदनशील गोपनीय सूचना के सहारे दुश्मन के ठिकाने को ध्वस्त कर देते हैं। इसका सबसे ताजा उदाहरण ईरान के सैन्य कमांडर मेजर जनरल सुलेमानी को लेकर किया गया अमेरिकी सैन्य बलों का ऑपरेशन था। अमेरिकी इसी काबिलियत के चलते दुश्मन के ठिकाने को तुरंत तबाह कर देता है।
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भारत से पोम्पियो ने दिया चीन को संदेश

भारत के साथ सूचनाओं के साझा उपयोग का सबसे विश्वसनीय करार करके अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने पड़ोसी देश चीन को साफ संदेश दे दिया है। उन्होंने इस गलवां घाटी में हुई हिंसा पर भी अपनी राय दी। पोम्पियो ने टू प्लस-टू डायलॉग के बाद साझा प्रेसवार्ता में कहा कि आज हम वॉर मेमोरियल भी गए। हमने वीर जवानों को श्रदांजलि भी दी। इनमें वह 20 भारतीय जवान भी शामिल हैं जो गलवां घांटी में चीन के सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में शहीद हुए थे। पोम्पियो ने कहा कि भारत अपनी अखंडता के लिए लड़ रहा है और हम उसके साथ खड़े हैं।

विदेश मंत्री पोम्पियो के साथ अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क टी एस्पर भी भारत की यात्रा पर हैं। दोनों नेताओं ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ टू प्लस-टू डॉयलाग में हिस्सा लिया। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की। भारत ने अमेरिका के साथ अपने विश्वसनीय सामरिक साझेदारी बढ़ने का गर्मजोशी से स्वागत किया।
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