केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव
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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को कहा कि, अत्यधिक शिकार होने की वजह से चीता देश में विलुप्त होने के कगार पर थे। ऐसे में नामाबिया से चीतों को लाकर देश की बिगड़गती पारिस्थिति को दूर किया जा रहा है। 28वें ओजोन दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने शीतलन के उद्देश्यों के लिए ऊर्जा के सावधानीपूर्वक उपयोग पर भी जोर दिया। भारत उन देशों में से एक है जो पारिस्थितिक गलतियों को पहले से करता आया है। उन गलितयों को सुधारा जा रहा है। भारत में शिकार अधिक होने की वजह से चीता विलुप्त हो गए।
उन्होंने कहा कि, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को अपने जन्मदिन पर मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए जा रहे आठ चीतों को रिहा करेंगे। चीता एकमात्र बड़ा मांसाहारी है जो भारत से पूरी तरह से मिटा दिया गया था क्योंकि शिकार की वजह से चीतों का नुकसान हुआ। 1952 में सरकार ने इस पशु को विलुप्त घोषित कर दिया।
यादव ने कहा कि ओजोन परत के संरक्षण के लिए वियना कन्वेंशन और इसके मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के एक पक्ष के रूप में भारत ने ओजोन को कम करने वाले पदार्थों के उत्पादन और खपत को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने में सक्रिय भूमिका निभाई है। देश में चीतों का आना किसी सफलता की कहानी से कम नहीं है। मंत्री ने कहा कि भारत ने पीएम मोदी के नेतृत्व में मार्च 2019 में इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान (आईसीएपी) लॉन्च किया, जो दुनिया में अपनी तरह का पहला प्रयास है।
आईसीएपी का प्राथमिक उद्देश्य शीतलन मांग को कम करने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और प्रौद्योगिकी विकल्पों को आगे बढ़ाने के लिए एक एकीकृत दीर्घकालिक दृष्टि है। यादव ने कहा कि, विकसित देश, जहां दुनिया की आबादी का 17 प्रतिशत है, वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का 60 प्रतिशत हिस्सा है। उन्होंने कहा, भारत दुनिया की 17 प्रतिशत आबादी का घर है और वैश्विक कार्बन उत्सर्जन के केवल 4 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि भारत पीएम मोदी के जीवन के मंत्र को ध्यान में रखते हुए विकास के पथ पर आगे बढ़ता रहेगा।